योगी सरकार में किसानों के कर्ज का ब्याज 18 से घटकर 6 प्रतिशत

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना से छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा सस्ता दीर्घकालिक ऋण
लखनऊ, 23 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को खेती के लिए सस्ता संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम्य विकास बैंक (एलडीबी) से मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण की ब्याज दर घटाकर छह प्रतिशत कर दी गई है। एक समय यही ऋण किसानों को 18 प्रतिशत तक की ब्याज दर पर मिलता था।
10 लाख के ऋण पर ब्याज में 50 हजार रुपये का अंतर
ब्याज दर में पांच प्रतिशत अंक की कमी का सीधा असर किसानों की लागत पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर 10 लाख रुपये के ऋण पर 11 प्रतिशत की दर से एक वर्ष का साधारण ब्याज 1.10 लाख रुपये होता है, जबकि छह प्रतिशत की दर पर यह राशि 60 हजार रुपये रह जाएगी। इस तरह समान मूलधन पर एक वर्ष के ब्याज में 50 हजार रुपये का अंतर होगा। हालांकि वास्तविक बचत ऋण की अवधि, किस्त और बकाया मूलधन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
पांच लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना के शुभारंभ के दौरान अगले कुछ वर्षों में पांच लाख लघु एवं सीमांत किसानों को इस ऋण सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। योजना के तहत खेती-बाड़ी, ट्रैक्टर, कृषि मशीनरी और अन्य कृषि जरूरतों के लिए कम ब्याज पर दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। योजना की शुरुआत के अवसर पर पांच किसानों को ऋण स्वीकृति पत्र भी प्रदान किए गए।
18 से घटकर छह प्रतिशत हुआ ब्याज
एलडीबी से किसानों को मिलने वाले दीर्घकालिक ऋण की ब्याज दर पहले 18 प्रतिशत तक थी। बाद में इसे घटाकर 14 प्रतिशत और फिर करीब 11 प्रतिशत किया गया। अब मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत यह दर छह प्रतिशत कर दी गई है। इस तरह पुराने 18 प्रतिशत के स्तर की तुलना में वर्तमान ब्याज दर एक-तिहाई रह गई है।
कृषि में बड़े निवेश के लिए मिलेगी सस्ती पूंजी
सरकार का मानना है कि सस्ते दीर्घकालिक ऋण का सबसे अधिक लाभ उन छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा, जिन्हें कृषि मशीनरी या खेती से जुड़े अन्य कार्यों के लिए एकमुश्त बड़े निवेश की जरूरत होती है। कम ब्याज पर संस्थागत पूंजी उपलब्ध होने से किसानों पर ब्याज का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “अन्नदाता किसान खुशहाल होगा तो भारत खुशहाल होगा और किसान समृद्ध होगा तो भारत भी समृद्ध होगा।” इसी सोच के तहत किसानों की पूंजी संबंधी जरूरतों को कम ब्याज वाले ऋण के माध्यम से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
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