हरियाणा में मानसून कमजोर, जुलाई में 27% कम बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता
कई जिलों में जल संकट की आशंका, खरीफ फसलों और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

चंडीगढ़ | 1 अगस्त 2026
हरियाणा में इस वर्ष मानसून की रफ्तार उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 के दौरान राज्य में सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कम बारिश का सबसे अधिक प्रभाव खरीफ फसलों, जलाशयों और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
राज्य के कई जिलों में वर्षा की कमी के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है। धान, बाजरा, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई तथा उनकी शुरुआती बढ़वार पर इसका असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो सिंचाई पर निर्भरता बढ़ेगी और किसानों की लागत में भी इजाफा होगा।
कम वर्षा के कारण भूजल स्तर, तालाबों और अन्य जल स्रोतों पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है। प्रशासन और संबंधित विभाग जल संरक्षण तथा उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रहे हैं, ताकि संभावित जल संकट से निपटा जा सके।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगस्त महीने में भी सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय होता है, तो वर्षा की कमी की कुछ हद तक भरपाई संभव है।
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