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दीपोत्सव-2026 में लोक संस्कृति का महाकुंभ, यूपी के 16 जिलों सहित देशभर के कलाकार बिखेरेंगे रंग

मयूर से छऊ और घूमर से झिझिया तक दिखेगी लोक संस्कृतियों की अनूठी झलक, लोकनृत्यों से सजेगी रामनगरी की शोभायात्रा

लखनऊ, 4 नवंबर 2026। दीपोत्सव-2026 में इस बार अयोध्या की सड़कों और सांस्कृतिक मंचों पर देश की समृद्ध लोक संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकार अपने पारंपरिक नृत्य, संगीत और लोक विधाओं की प्रस्तुतियों से रामनगरी को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर करेंगे। मयूर, ढेढ़िया, पाई डंडा, करमा, छऊ, घूमर और झिझिया जैसे लोकनृत्य आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलाकार अपनी विशिष्ट लोक विधाओं का प्रदर्शन करेंगे। इनमें मथुरा का मयूर और बम रसिया, प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल-सिंघा और करमा नृत्य प्रमुख हैं। वहीं अयोध्या के कलाकार बधावा, फरुवाही तथा डमरू एवं शंख नृत्य प्रस्तुत करेंगे।

इसके अलावा गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झांसी का राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं से परिचित कराएगा।

देशभर की लोक कलाओं का होगा संगम

दीपोत्सव में उत्तर प्रदेश के साथ अन्य राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पश्चिम बंगाल का श्री खोल, ओडिशा का मास्क डांस, शाही जात्रा, रणप्पा चढैय्या और शंख वादन, झारखंड का पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा तथा गुजरात का तलवार रास प्रस्तुत किया जाएगा।

वहीं राजस्थान का घूमर-चरी, बिहार की झिझिया, चेन्नई की कावड़ी, कड़गम और मयूर नृत्य तथा आंध्र प्रदेश का बोनालू भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाएंगे। इन प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को विभिन्न राज्यों की वेशभूषा, संगीत, नृत्य शैली और परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।

शोभायात्रा में लोकनृत्यों की दिखेगी भव्यता

दीपोत्सव की शोभायात्रा में भी लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से उत्सव को जीवंत बनाएंगे। इसमें प्रयागराज का ढेढ़िया, मथुरा का मयूर, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल एवं सिंघा और अयोध्या का बधावा नृत्य शामिल रहेगा। इसके साथ ही आजमगढ़ के कलाकार धोबिया नृत्य और प्रयागराज के कलाकार कबीरी गायन की प्रस्तुति देंगे।

नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की पहल

दीपोत्सव में लोक कलाकारों की भागीदारी का उद्देश्य पारंपरिक कला विधाओं को मंच प्रदान करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। इससे कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और क्षेत्रीय लोक कलाओं को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर मिलेगा।

अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि दीपोत्सव-2026 में दीपों की रोशनी के साथ लोकनृत्य, लोकसंगीत और पारंपरिक कलाओं की छटा रामनगरी को विशेष पहचान देगी। देश के विभिन्न राज्यों और उत्तर प्रदेश के जिलों से आने वाले कलाकार अयोध्या को सांस्कृतिक संगम का स्वरूप प्रदान करेंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता, परंपरा और एकता का संदेश देश-दुनिया तक पहुंचेगा।

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