228 तस्वीरों से सजी लाल बारादरी बनी राष्ट्रीय फोटोग्राफी कला का मंच

देशभर के 167 फोटोग्राफरों की प्रविष्टियों में से 37 पोर्टफोलियो चयनित, पांच फोटोग्राफर सम्मानित
10 अक्टूबर तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी
लखनऊ, 5 अक्टूबर। राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक लाल बारादरी सोमवार को देशभर की फोटोग्राफी प्रतिभाओं के लिए राष्ट्रीय कला मंच में तब्दील हो गई। उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित 19वीं अखिल भारतीय फोटोग्राफी कला प्रदर्शनी 2026-27 में चयनित और पुरस्कृत फोटोग्राफरों की 228 कृतियां प्रदर्शित की गईं।
कैंसरबाग स्थित अकादमी परिसर में आयोजित प्रदर्शनी एवं पुरस्कार समारोह का उद्घाटन भारतेन्दु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रतिशंकर त्रिपाठी, वरिष्ठ फोटोग्राफर एवं द हिंदू के सेवानिवृत्त फोटोग्राफर सुबीर राय, वरिष्ठ कलाकार राजेंद्र प्रसाद, राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा तथा उपाध्यक्ष गिरिश चंद्र मिश्रा ने किया।
इस वर्ष देशभर से 167 फोटोग्राफरों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं। इन प्रविष्टियों का मूल्यांकन लखनऊ के अनिल रिसाल सिंह, वाराणसी के डॉ. राधाकृष्ण गणेशन और नई दिल्ली के डॉ. कुमार जिज्ञासु की विशेषज्ञ चयन समिति ने किया।

37 फोटोग्राफरों के पोर्टफोलियो चयनित
चयन समिति ने 32 फोटोग्राफरों के पोर्टफोलियो का चयन किया। प्रत्येक पोर्टफोलियो में छह तस्वीरें शामिल हैं। इसके अलावा पुरस्कारों के लिए पांच अन्य पोर्टफोलियो चुने गए। इस तरह कुल 37 फोटोग्राफरों के पोर्टफोलियो प्रदर्शनी का हिस्सा बने।
पांच फोटोग्राफरों को मिला सम्मान
पश्चिम बंगाल के हुगली निवासी हैप्पी मुखर्जी, लखनऊ के अजयेश जायसवाल और वाराणसी के कृष्णा सिंह को उत्कृष्ट पोर्टफोलियो पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को 20 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई।

वहीं कोलकाता के अभिषेक बसाक और इंदौर के प्रवीण रावत को विशेष पोर्टफोलियो पुरस्कार प्रदान किया गया। दोनों को 10-10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। सभी पांचों सम्मानित फोटोग्राफरों को प्रमाण-पत्र और स्मृति चिह्न भी प्रदान किए गए।

राष्ट्रीय स्तर पर उभरती प्रतिभाओं का संगम
प्रदर्शनी में लखनऊ और वाराणसी के फोटोग्राफरों की मौजूदगी ने उत्तर प्रदेश की समकालीन फोटोग्राफी प्रतिभा को देश के अन्य हिस्सों के कलाकारों के साथ एक साझा मंच प्रदान किया है। प्रदर्शनी में अलग-अलग रचनात्मक दृष्टिकोण और फोटोग्राफी में किए जा रहे प्रयोग देखने को मिल रहे हैं।
अकादमी के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि प्रदर्शनी में पुरस्कार विजेताओं, चयनित प्रतिभागियों और चयन समिति के सदस्यों के पोर्टफोलियो से कुल 228 तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। इन कृतियों के माध्यम से भारतीय फोटोग्राफी में उभर रहे विविध दृश्य दृष्टिकोणों को देखा जा सकता है।

10 अक्टूबर तक देख सकेंगे दर्शक
प्रदर्शनी आम दर्शकों के लिए 10 अक्टूबर तक खुली रहेगी। फोटोग्राफी प्रेमी, कला विद्यार्थी और आम नागरिक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कैसरबाग स्थित लाल बारादरी भवन में प्रदर्शित तस्वीरों का अवलोकन कर सकेंगे।
2001 से आयोजित हो रही प्रदर्शनी
राज्य ललित कला अकादमी वर्ष 2001 से अखिल भारतीय फोटोग्राफी कला प्रदर्शनी का आयोजन कर रही है। इसका उद्देश्य फोटोग्राफी को स्वतंत्र दृश्य कला के रूप में प्रोत्साहित करना तथा फोटोग्राफरों को नई तकनीकों और रचनात्मक दृष्टिकोणों के साथ प्रयोग करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।

वर्तमान आयोजन से पहले इस प्रदर्शनी के 18 संस्करण आयोजित हो चुके हैं। अकादमी के अनुसार, यह देश की एकमात्र राज्य स्तरीय कला अकादमी है जो नियमित रूप से इस प्रकार की प्रतिस्पर्धात्मक राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी आयोजित करती है।
उभरते फोटोग्राफरों को स्थापित कलाकारों के साथ मंच
प्रदर्शनी की विशेषता यह है कि इसमें उभरते फोटोग्राफरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके कलाकारों के साथ अपनी कृतियां प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। लखनऊ में देशभर के फोटोग्राफरों के पोर्टफोलियो को एक मंच पर लाकर यह आयोजन उत्तर प्रदेश को समकालीन फोटोग्राफी में संवाद, प्रयोग और प्रतिभा सम्मान के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
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