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सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखें : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

जंतर-मंतर प्रदर्शन में अभद्र भाषा पर जताई नाराज़गी, लोकतांत्रिक मूल्यों और शालीन संवाद की संस्कृति अपनाने की अपील

लखनऊ | 2 अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सार्वजनिक जीवन में मर्यादा, शालीनता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन विरोध या प्रदर्शन के दौरान भाषा और व्यवहार की गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है।

राज्यपाल ने हाल ही में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों और आपत्तिजनक भाषा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भाषा भारतीय संस्कृति, सभ्यता और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है तथा इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था संवाद, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित है। यदि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा का पालन नहीं किया जाएगा, तो लोकतंत्र की गरिमा और सामाजिक सौहार्द दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने विचार पूरी स्वतंत्रता के साथ रखें, लेकिन अभिव्यक्ति के दौरान संयम, शिष्टाचार और जिम्मेदारी का परिचय अवश्य दें।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विशेष रूप से युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सकारात्मक, जिम्मेदार और सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि आज का युवा देश का भविष्य है और उसके आचरण से समाज की दिशा तय होती है। इसलिए लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ-साथ लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों का भी पूरी निष्ठा से पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मतभेद होना लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन मतभेद को मनभेद में बदलने से बचना चाहिए। स्वस्थ संवाद, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता ही एक मजबूत और सशक्त लोकतंत्र की पहचान है।

राज्यपाल ने समाज के सभी वर्गों से सार्वजनिक जीवन में गरिमा बनाए रखने, संवाद की स्वस्थ परंपरा को आगे बढ़ाने तथा भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा और प्रतिष्ठा को मजबूत करने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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