State NewsUttar Pradesh

महादेव के बुलावे पर निकले श्रद्धालु, पाँच दिन में पूरी की आदि कैलाश और ओम पर्वत की दिव्य यात्रा

लखनऊ। कुछ यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं होतीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव बन जाती हैं। जून 2026 में लखनऊ से निकले 15 श्रद्धालुओं के दल ने आदि कैलाश और ओम पर्वत की पाँच दिवसीय यात्रा पूरी कर एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया। यात्रियों का कहना है कि यह यात्रा किसी पूर्व योजना का परिणाम नहीं थी, बल्कि स्वयं महादेव के बुलावे का आह्वान थी।

यात्रा की शुरुआत छठे बड़े मंगल के दिन हुई, जब मंदिर में आदि कैलाश की चर्चा के दौरान अचानक यात्रा का विचार बना। देखते ही देखते चार लोगों की चर्चा 15 श्रद्धालुओं के कारवां में बदल गई और अगले ही दिन सभी लखनऊ से उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए।

टनकपुर के बाद पहाड़ी मार्ग शुरू होते ही प्रकृति के अद्भुत दृश्य यात्रियों का स्वागत करने लगे। पहले दिन दल ने लगभग 448 किलोमीटर की दूरी तय कर पिथौरागढ़ में रात्रि विश्राम किया। 42 डिग्री सेल्सियस की गर्मी से निकलकर 20 डिग्री के सुहावने मौसम में पहुँचना अपने आप में रोमांचकारी अनुभव रहा।

अगले दिन दल धारचूला पहुँचा, जहाँ भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली काली नदी के बीच प्राकृतिक सौंदर्य ने सभी का मन मोह लिया। यहाँ इनर लाइन परमिट, चिकित्सीय परीक्षण और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद यात्रा आगे बढ़ सकी।

धारचूला से आगे बढ़ते हुए यात्रियों ने गूंजी और नाबिडांग में रात्रि विश्राम किया। नाबिडांग में तापमान लगभग 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, लेकिन श्रद्धालुओं में आदि कैलाश के दर्शन की उत्सुकता बनी रही।

तीसरे दिन दल आदि कैलाश पहुँचा। मार्ग में बदलते मौसम, बादलों और बर्फबारी के बीच जब श्रद्धालुओं ने पहली बार आदि कैलाश के दर्शन किए तो वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो उठा। माइनस एक डिग्री तापमान और चारों ओर फैली बर्फ के बीच पर्वत के नीचे दिखाई देने वाला प्राकृतिक त्रिशूल श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पार्वती कुंड के भी दर्शन किए। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माइनस 3 से 4 डिग्री तापमान और तेज बर्फबारी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।

वापसी के दौरान प्राकृतिक सौंदर्य के बीच नदी किनारे विश्राम किया गया, जहाँ यात्रियों ने सामूहिक रूप से समय बिताया और गरमा-गरम भोजन का आनंद लिया।

चौथे दिन दल ने ओम पर्वत के दर्शन किए। कठिन ऑफरोड मार्ग और गहरी खाइयों के बीच स्थित ओम पर्वत पर बर्फ से बनी प्राकृतिक ‘ॐ’ की आकृति देखकर सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। यात्रियों ने इसे सनातन संस्कृति और प्रकृति के अद्भुत संगम का जीवंत प्रतीक बताया।

इसके बाद दल ने लीपूलेक दर्रे तक पहुँचने का प्रयास किया, लेकिन सीमा क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। श्रद्धालुओं ने इसे भी भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार किया।

पूरी यात्रा के दौरान भारतीय सेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभिन्न चेक पोस्टों पर जवानों ने यात्रियों का मार्गदर्शन किया। श्रद्धालुओं ने सीमा पर तैनात सैनिकों के समर्पण और त्याग को नमन किया।

पाँच दिन की इस यात्रा के बाद जब दल लखनऊ लौटा, तो सभी श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। यात्रियों के अनुसार, आदि कैलाश केवल एक तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति और ईश्वर के साक्षात अनुभव का अवसर है।

यात्रा के प्रमुख पड़ाव

  • पहला दिन: लखनऊ से पिथौरागढ़ (448 किमी), रात्रि विश्राम पिथौरागढ़
  • दूसरा दिन: पिथौरागढ़ से धारचूला, इनर लाइन परमिट की प्रक्रिया, रात्रि विश्राम गूंजी
  • तीसरा दिन: गूंजी से आदि कैलाश (35 किमी), दर्शन एवं पार्वती कुंड भ्रमण, रात्रि विश्राम नाबिडांग
  • चौथा दिन: नाबिडांग से ओम पर्वत (18 किमी), दर्शन के बाद पिथौरागढ़ वापसी
  • पाँचवाँ दिन: पिथौरागढ़ से लखनऊ वापसी

विशेष तथ्य: इस पूरी यात्रा के दौरान अधिकांश क्षेत्र मोबाइल नेटवर्क से मुक्त रहे, जिससे यात्रियों को पाँच दिनों तक प्रकृति और अपने साथियों के साथ बिना डिजिटल व्यवधान के समय बिताने का अवसर मिला।

Advertisement….

Related Articles

Back to top button