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NDA में इतिहास रचने वाली लेफ्टिनेंट शानन ढाका बनीं भारतीय सेना की अधिकारी

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद NDA टॉप करने वाली पहली महिला, अब पूर्वी लद्दाख में संभालेंगी जिम्मेदारी

नई दिल्ली। भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच लेफ्टिनेंट शानन ढाका ने एक नया इतिहास रच दिया है। 23 वर्षीय शानन 13 जून 2026 को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त कर चुकी हैं। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला हैं। उनकी सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह 2021 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओं को NDA में प्रवेश की अनुमति देने वाले ऐतिहासिक फैसले का भी परिणाम है।

सैनिक परिवार से मिला सेवा का संस्कार

हरियाणा के रोहतक जिले के सुंदराना गांव की रहने वाली शानन ढाका एक सैनिक परिवार से आती हैं। उनके दादा सूबेदार (सेवानिवृत्त) चंद्रभान ढाका भारतीय सेना में रहे, जबकि उनके पिता विजय कुमार ढाका आर्मी सर्विस कॉर्प्स से नायब सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्तमान में पंचकूला पुलिस में स्पेशल पुलिस ऑफिसर (SPO) के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

शानन की बड़ी बहन कैप्टन जोनुन ढाका मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में अधिकारी हैं, जबकि छोटी बहन अभी कक्षा 9 में पढ़ाई कर रही हैं। परिवार ने हमेशा बेटियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया।

शानदार शैक्षणिक रिकॉर्ड

शानन ने रुड़की, जयपुर और चंडीमंदिर के आर्मी पब्लिक स्कूलों से पढ़ाई की। उन्होंने कक्षा 10 में 97.4 प्रतिशत और कक्षा 12 में 98.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई शुरू की और प्रारंभिक लक्ष्य UPSC सिविल सेवा परीक्षा था।

NDA परीक्षा में रचा इतिहास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शानन ने वर्ष 2021 में पहली बार आयोजित महिला उम्मीदवारों के लिए NDA परीक्षा दी। 14 नवंबर 2021 को घोषित परिणाम में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक-10 प्राप्त की और महिलाओं में पहला स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया। इस परीक्षा में लगभग 5.75 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, जिनमें 1.77 लाख महिलाएं शामिल थीं।

NDA से IMA तक का सफर

शानन ने अगस्त 2022 में NDA के 148वें कोर्स में प्रवेश लिया। तीन वर्षों तक कठोर सैन्य प्रशिक्षण, शारीरिक अभ्यास, नेतृत्व विकास और सैन्य शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने 30 मई 2025 को NDA से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) में अंतिम प्रशिक्षण पूरा किया।

13 जून 2026 को IMA की 158वीं रेगुलर कोर्स पासिंग आउट परेड में उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्रदान किया गया। वह NDA के पहले महिला बैच की उन 9 महिला अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें भारतीय सेना में कमीशन मिला।

पूर्वी लद्दाख में पहली तैनाती

कमीशन मिलने के बाद लेफ्टिनेंट शानन ढाका की पहली नियुक्ति पूर्वी लद्दाख के चुनौतीपूर्ण और ऊंचाई वाले क्षेत्र में की गई है। यह तैनाती भारतीय सेना की उस नीति को दर्शाती है, जिसमें महिला और पुरुष अधिकारियों को समान अवसर और जिम्मेदारियां दी जाती हैं।

राष्ट्रपति ने बताया ऐतिहासिक क्षण

पासिंग आउट परेड की समीक्षा करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने महिला अधिकारियों के इस पहले बैच को भारतीय सैन्य इतिहास का “ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण और भारत के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

हाल ही में पंचकूला पुलिस द्वारा सम्मानित की गईं लेफ्टिनेंट शानन ढाका का कहना है कि सेना में शामिल होना केवल वर्दी या पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि देश सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनका संदेश है कि “यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और स्वयं पर विश्वास हो, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।”

लेफ्टिनेंट शानन ढाका की सफलता आज देशभर की उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर राष्ट्र सेवा का सपना देख रही हैं।

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