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टीम लखनऊ ने निभाया अपना संकल्प, 50 अग्नि पीड़ित परिवारों को फिर से बसाया

राख के ढेर को फिर से घर में बदला, उम्मीद और इंसानियत की मिसाल बनी टीम लखनऊ

लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र में 15 अप्रैल को लगी भीषण आग ने पूरी बस्ती की जिंदगी को तहस-नहस कर दिया था, जिसमें लगभग 450 झोपड़ियां जलकर राख हो गईं और सैकड़ों परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। इस दर्दनाक हादसे में लोगों के घर ही नहीं, बल्कि उनकी सालों की मेहनत, सपने और रोज़मर्रा की जिंदगी भी जलकर खत्म हो गई। ऐसे कठिन समय में सामाजिक संस्था टीम लखनऊ ने आगे बढ़कर इंसानियत की मिसाल पेश की और तुरंत मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया तथा विस्तृत सर्वे कराया।

सर्वे के आधार पर सबसे अधिक जरूरतमंद 50 परिवारों को चिन्हित किया गया, जिन्हें सबसे पहले टट्टर, तिरपाल, बांस और प्लास्टिक उपलब्ध कराकर उनका अस्थायी आशियाना दोबारा खड़ा करने में मदद की गई, इसके बाद उनके जीवन को फिर से पटरी पर लाने के लिए आवश्यक घरेलू सामान भी वितरित किया गया। यह वितरण कार्यक्रम इंदिरा नगर के पानी गांव स्थित टीम लखनऊ कार्यालय में आयोजित किया गया, जहां मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली की सरपरस्ती में मौलाना काल्बे सिबतैंन नूरी, लखनऊ पश्चिम के विधायक अरमान खान, वरिष्ठ समाजसेवी मुरलीधर आहूजा और संस्था की संरक्षक निगहत खान सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

टीम लखनऊ ने केवल राहत सामग्री तक ही अपनी मदद सीमित नहीं रखी, बल्कि जिन परिवारों की साइकिलें, सिलाई मशीनें और रोज़गार के ठेले आग में नष्ट हो गए थे, उन्हें नए साधन उपलब्ध कराए ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बन सकें। इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष मुर्तुजा अली ने पीड़ित परिवारों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि उनके घर जरूर जले हैं, लेकिन उनका हौसला और मेहनत अभी भी जिंदा है, और टीम लखनऊ हर जरूरत में उनके साथ खड़ी रहेगी। कार्यक्रम में जुबैर अहमद, अब्दुल वहीद, वामिक खान, शैला ज़मां, गुरजीत सिंह छाबड़ा, कपिल अरोड़ा, जसबीर गांधी, तौसीफ हुसैन, खालिद इस्लाम, मो. शोएब सहित कई समाजसेवियों ने सहयोग दिया।

अंत में सभी 50 परिवारों को सम्मानपूर्वक आवश्यक सामग्री देकर विदा किया गया, जो केवल राहत वितरण नहीं बल्कि टूटे हुए हौसलों को फिर से खड़ा करने और नई उम्मीद जगाने का एक प्रेरणादायक प्रयास साबित हुआ, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर आगे आता है, तो राख से भी नई जिंदगी और नई उम्मीदें जन्म लेती हैं।

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