30 साल बाद पानी से लबालब हुआ मीरजापुर का जरगो बांध, किसानों में खुशी

योगी सरकार के प्रयासों से मेजा-जरगो लिंक नहर के खराब गेटों की मरम्मत, 150 क्यूसेक पानी की बर्बादी रुकी; 15 हजार किसानों को मिलेगा लाभ
लखनऊ, 28 अक्टूबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से मीरजापुर के जरगो बांध में करीब 30 वर्षों बाद पानी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होने से क्षेत्र के किसानों में खुशी है। मेजा-जरगो लिंक नहर के वर्षों से खराब पड़े दोनों अंडर स्लूस गेटों की मरम्मत के बाद बांध तक पानी पहुंचने का रास्ता सुचारु हो गया है। वर्तमान में नहर के माध्यम से बांध में 229 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जा रही है।
150 क्यूसेक पानी की बर्बादी पर लगी रोक
प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। मेजा-जरगो लिंक नहर के दोनों गेट लंबे समय से खराब थे, जिसके कारण करीब 150 क्यूसेक पानी लगातार व्यर्थ बह रहा था। रिसाव के चलते नहर के लगभग 10 किलोमीटर हिस्से में सिल्ट की सफाई भी प्रभावित हो रही थी। गेटों की मरम्मत से पानी की बर्बादी रोकने के साथ नहर की जल वहन क्षमता सुधारने का रास्ता खुला है।
15 मीटर गहराई में चुनौतीपूर्ण मरम्मत
मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह के अनुसार, दोनों गेट जल सतह से करीब 15 मीटर नीचे स्थित थे। अधिक दबाव और लगातार रिसाव के कारण इनकी मरम्मत चुनौतीपूर्ण थी। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की सिंचाई कार्यशाला खंड, बरेली की टीम ने आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ इंजीनियरिंग की मदद से मरम्मत का कार्य पूरा किया। पानी के भीतर गेटों की स्थिति का निरीक्षण करने के लिए 4K कैमरे से लैस रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) का इस्तेमाल किया गया।
रबर सील, रोलर और बेयरिंग बदले गए
निरीक्षण के बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गई। पुरानी रबर सील को बदलने के साथ रोलर और बेयरिंग भी नए लगाए गए। दीवार में बने छेदों को विशेष हाई-प्रेशर रिपेयर सामग्री से भरा गया। इसके बाद गेटों को दोबारा स्थापित कर लीकेज टेस्टिंग की गई। इससे वर्षों से जारी रिसाव की समस्या दूर हुई और नहर में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता बहाल हुई।
6,300 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा लाभ
जरगो बांध में पानी की आपूर्ति बेहतर होने से मीरजापुर के करीब 15 हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना से लगभग 6,300 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे खरीफ और रबी की फसलों की सिंचाई में मदद मिलेगी तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। साथ ही, पानी की बर्बादी रुकने और नहर से सिल्ट हटाने का रास्ता खुलने से सिंचाई व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी।
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