धर्मेंद्र कश्यप ने थामा सपा का दामन, बेटी और सैकड़ों समर्थकों के साथ पहुंचे लखनऊ

अखिलेश यादव ने दिलाई पार्टी की सदस्यता, रुहेलखंड की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज
बरेली/लखनऊ। रुहेलखंड की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कुमार कश्यप ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। वह अपनी बेटी कीर्ति कश्यप और सैकड़ों समर्थकों के साथ गाड़ियों के काफिले में लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय पहुंचे। यहां सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई और उनका स्वागत किया। इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बरेली और आसपास के क्षेत्रों में बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बेटी और समर्थकों के साथ लखनऊ पहुंचे धर्मेंद्र कश्यप
धर्मेंद्र कश्यप मंगलवार को बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ सपा मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ बेटी कीर्ति कश्यप भी मौजूद रहीं। पार्टी में शामिल होने के दौरान समर्थकों में उत्साह दिखाई दिया। बरेली के कई सपा नेता और पदाधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रहे। धर्मेंद्र कश्यप की राजनीतिक सक्रियता और आंवला लोकसभा क्षेत्र में उनके प्रभाव को देखते हुए उनके इस कदम को सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा में उपेक्षा से नाराजगी की चर्चाएं
धर्मेंद्र कश्यप पिछले कुछ समय से भाजपा संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर नाराज बताए जा रहे थे। सात अक्टूबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर समुद्र किनारे सूर्यास्त की तस्वीर के साथ ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर पोस्ट साझा की थी। इसके बाद उनके भाजपा छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका विरोध करने वाले कुछ नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने और राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने को भी उनकी नाराजगी की संभावित वजहों के तौर पर देखा जा रहा था।
अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद तेज हुई थीं अटकलें
भाजपा से दूरी बनाने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने 11 अक्टूबर को लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। इस दौरान उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के अलावा सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव, वरिष्ठ नेता वीरपाल सिंह यादव और पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार भी मौजूद बताए गए थे। इस मुलाकात के बाद उनके सपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब औपचारिक सदस्यता ग्रहण करने के बाद इन अटकलों पर विराम लग गया है।
बिथरी चैनपुर सीट से बेटी को चुनाव लड़ाने की चर्चा
धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चाएं हैं। राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में बिथरी चैनपुर सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में इस सीट पर पहले से सक्रिय संभावित दावेदारों के बीच राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना है।
बसपा और सपा से विधायक, भाजपा से दो बार बने सांसद
धर्मेंद्र कुमार कश्यप का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा है। वह वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी और 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। मई 2013 में उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। भाजपा ने वर्ष 2014 में उन्हें आंवला लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां जीत दर्ज कर वह पहली बार सांसद बने। वर्ष 2019 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब वह दोबारा सपा में शामिल हो गए हैं।
भाजपा सरकार पर साधा निशाना, अखिलेश ने जताई मजबूती की उम्मीद
सपा में शामिल होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बुलडोजर कार्रवाई में गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, अखिलेश यादव ने उनका स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके पार्टी में आने से संगठन को मजबूती मिलेगी।
रुहेलखंड की राजनीति पर पड़ सकता है असर
धर्मेंद्र कश्यप को रुहेलखंड में कश्यप समाज के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में गिना जाता है। आंवला लोकसभा क्षेत्र और बरेली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण उनका अपना समर्थक वर्ग माना जाता है। ऐसे में सपा उनके राजनीतिक अनुभव और सामाजिक प्रभाव का लाभ उठाने की कोशिश कर सकती है। दूसरी ओर, उनके भाजपा छोड़ने का स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस फैसले ने बरेली से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।
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