लोहिया विधि विश्वविद्यालय के 5वें दीक्षांत समारोह में सीएम योगी ने मेधावी विद्यार्थियों को पदक देकर किया सम्मानित

260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिलीं उपाधियां, 17 मेधावियों को 20 पदक; मुख्यमंत्री ने युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का किया आह्वान
लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ के पांचवें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्र-छात्राओं को पदक वितरित कर सम्मानित किया और उन्हें संबोधित किया। समारोह में शैक्षणिक उत्कृष्टता हासिल करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर कुल 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 17 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 20 पदकों से सम्मानित किया गया।
समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एवं विश्वविद्यालय के विजिटर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विधि शिक्षा, शैक्षणिक उपलब्धियों और युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर जोर दिया गया।

पांच पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को मिली उपाधि
दीक्षांत समारोह में बीए एलएलबी (ऑनर्स) के 173 विद्यार्थियों, एलएलएम के 47 विद्यार्थियों, साइबर विधि में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के 16 विद्यार्थियों, बौद्धिक संपदा अधिकार में आठ विद्यार्थियों और मीडिया विधि, मनोरंजन एवं नैतिकता में दो विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त 14 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। इस प्रकार समारोह में विधि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सम्मानित किया गया।

मेधावी छात्र-छात्राओं को मिले पदक
समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। बीए एलएलबी (ऑनर्स) में तेजस्विनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला। एलएलएम में रूपल जायसवाल, चित्रा सिंह और सौम्या गिरी ने क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक हासिल किए।
साइबर विधि में भास्कर पांडेय को स्वर्ण, जयंत अग्रवाल को रजत और चिराग निगम को कांस्य पदक दिया गया। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडेय को स्वर्ण, रितेश मेहता को रजत और ईशा अस्थाना को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। वहीं, मीडिया विधि, मनोरंजन एवं नैतिकता में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संस्तुभ सोनकर को रजत पदक प्रदान किया गया।
बीए एलएलबी (ऑनर्स) की छात्रा ईशा अग्रवाल ने विशेष उपलब्धि हासिल की। उन्हें रजत पदक के अतिरिक्त आपराधिक विधि, संवैधानिक विधि और वर्ष की सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी श्रेणी में तीन स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इस तरह उन्हें कुल चार पदक मिले। समारोह में कराधान विधि, प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन और मूट कोर्ट में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागिता के लिए भी विशेष पदक प्रदान किए गए।

मुख्यमंत्री ने कानून के शासन और राष्ट्र निर्माण पर दिया जोर
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले ‘रूल ऑफ माफिया’ का प्रभाव था, लेकिन अब ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन स्थापित करने की दिशा में काम किया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रयागराज के एक माफिया का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले उसके प्रभाव के सामने कानून कमजोर पड़ता दिखाई देता था। उन्होंने इसे प्रदेश की शासन व्यवस्था में आए बदलाव के संदर्भ में प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को देश के भविष्य का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने का संदेश भी दिया। उन्होंने भारत के वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को एक प्रतीकात्मक ‘केस नंबर 2047’ के रूप में समझाया। इस रूपक में उन्होंने देश के नागरिकों को याचिकाकर्ता और युवा पीढ़ी को अधिवक्ता के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तथ्यों, साक्ष्यों, तर्क और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
विधि शिक्षा और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश
पांचवें दीक्षांत समारोह ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित करने के साथ विधि शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम में उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर उनकी मेहनत, अनुशासन और शैक्षणिक प्रतिबद्धता की पहचान बना। मुख्यमंत्री के संबोधन में कानून के शासन, सुशासन और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका प्रमुख विषय रहे।
दीक्षांत समारोह का मुख्य संदेश यह रहा कि विधि के विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग न्याय, संवैधानिक मूल्यों तथा समाज के प्रति जिम्मेदारियों को निभाने में करना चाहिए।
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