लखनऊ में दशहरे पर दिखेगा तकनीक और परंपरा का संगम, ऐशबाग में 75 फुट का चलायमान रावण बनेगा आकर्षण

एआई से सजी रामलीला, रोबोटिक हाथी और पर्यावरण के अनुकूल आतिशबाजी से खास होगा विजयादशमी का उत्सव
लखनऊ, 20 अक्टूबर 2026। राजधानी लखनऊ में विजयादशमी के अवसर पर इस बार परंपरा और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। शहर की ऐतिहासिक रामलीलाओं में भगवान श्रीराम की विजय का मंचन, रावण दहन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को खास अंदाज में प्रस्तुत करने की तैयारियां की गई हैं। ऐशबाग की रामलीला में 75 फुट ऊंचा चलायमान रावण मुख्य आकर्षण रहेगा। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रस्तुतियां, विशाल एलईडी स्क्रीन, बेहतर साउंड सिस्टम और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था दर्शकों को रामकथा से जोड़ने का प्रयास करेंगी।
ऐशबाग रामलीला में 75 फुट का चलायमान रावण
लखनऊ की ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला में इस बार रावण दहन को विशेष बनाने के लिए उसके पुतले में चलायमान हिस्से लगाए गए हैं। इससे दहन से पहले रावण का पुतला अधिक जीवंत दिखाई देगा। पुतले के निर्माण में दिल्ली से आए कारीगर इरफान और उनके सहयोगियों ने करीब एक महीने तक काम किया।
आयोजकों के अनुसार, रावण दहन के दौरान पर्यावरण के अनुकूल पटाखों और विशेष आतिशबाजी की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक उत्सव की भव्यता बनाए रखते हुए सुरक्षा और पर्यावरण का ध्यान रखना है।
एआई तकनीक से बदलेगा रामलीला देखने का अनुभव
इस वर्ष ऐशबाग की रामलीला में तकनीक का इस्तेमाल भी प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। रामायण के विभिन्न प्रसंगों को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए एआई आधारित विशेष प्रस्तुतियां तैयार की गई हैं। बड़ी एलईडी स्क्रीन, बेहतर ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था के जरिए मंच पर होने वाले घटनाक्रमों को दूर बैठे दर्शकों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
रामलीला के जुलूस में 12 फुट ऊंचा रोबोटिक हाथी भी आकर्षण का केंद्र बना है। पारंपरिक पात्रों, घोड़ों, ऊंटों और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के मेल से आयोजन को नया रूप दिया गया है। आयोजकों का प्रयास है कि रामायण की मूल कथा और धार्मिक महत्त्व को बरकरार रखते हुए नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ा जाए।
सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा है ऐशबाग का आयोजन
ऐशबाग की रामलीला लखनऊ की सांस्कृतिक पहचान का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। वर्षों से यहां रामायण के प्रसंगों का मंचन किया जाता रहा है। हर वर्ष विजयादशमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी भगवान श्रीराम की विजय का उत्सव देखने पहुंचते हैं।
रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, सत्य, त्याग और धर्म के संदेश को लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस बार भी आयोजन में धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक प्रस्तुति शैली पर जोर दिया गया है।
सदर और महानगर में भी होंगे भव्य आयोजन
ऐशबाग के अलावा लखनऊ के अन्य इलाकों में भी दशहरे को लेकर तैयारियां की गई हैं। सदर रामलीला में 75 फुट ऊंचे रावण और 35 फुट ऊंचे मेघनाद के पुतले आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यहां रामायण के प्रमुख प्रसंगों के मंचन के साथ रावण दहन का आयोजन प्रस्तावित है।
वहीं, महानगर में 60 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। आयोजकों ने भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की व्यवस्थाएं की हैं। शहर के विभिन्न रामलीला मैदानों में स्थानीय समितियां अपने स्तर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था पर भी रहेगा ध्यान
दशहरे के अवसर पर रामलीला मैदानों और रावण दहन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में आयोजन समितियों और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों के लिए भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित दूरी, आवागमन और अग्नि सुरक्षा महत्त्वपूर्ण विषय हैं।
दर्शकों को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित आयोजन समिति की ओर से जारी समय और प्रवेश संबंधी निर्देशों की जानकारी लेकर ही घर से निकलें। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात संबंधी निर्देशों का पालन करना और बच्चों को अपने साथ सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, मर्यादा और नैतिकता को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। भगवान श्रीराम की विजय का प्रसंग यह संदेश देता है कि शक्ति और ज्ञान का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि धर्म और लोककल्याण के लिए होना चाहिए।
लखनऊ में इस बार का दशहरा अपनी ऐतिहासिक परंपरा, भव्य रामलीलाओं और आधुनिक तकनीक के मेल के कारण खास बन रहा है। ऐशबाग का चलायमान रावण और एआई आधारित प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण रहेंगी, वहीं विभिन्न इलाकों के आयोजन राजधानी की सांस्कृतिक विविधता और उत्सवधर्मिता को सामने लाएंगे।
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