‘ज्ञान का पिटारा’ ने बदली तस्वीर, ड्रॉपआउट की कगार से लौटकर होनहार छात्रा बनीं 10 वर्षीय श्रेया

प्रयागराज में ‘टीम बालिका’ और ‘एजुकेट गर्ल्स’ की पहल से बदली बच्ची की जिंदगी, हिंदी, अंग्रेजी और गणित में कर रही बेहतर प्रदर्शन
प्रयागराज, अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के एक परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली 10 वर्षीय श्रेया की कहानी शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद बनकर सामने आई है। बुनियादी समझ कमजोर होने के कारण पढ़ाई से दूर हो चुकीं श्रेया अब नियमित रूप से स्कूल जा रही हैं और हिंदी, अंग्रेजी तथा गणित जैसे विषयों में अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। ‘ज्ञान का पिटारा’ (जीकेपी) कार्यक्रम ने उनके भीतर पढ़ाई के प्रति रुचि और आत्मविश्वास जगाने में अहम भूमिका निभाई है।
पढ़ाई में कठिनाई के कारण स्कूल से बनाई दूरी
विद्यालय में दाखिला होने के बावजूद श्रेया बुनियादी शैक्षणिक समझ कमजोर होने के कारण अपनी कक्षा के अन्य बच्चों से पीछे रह गई थीं। विषयों को समझने में कठिनाई के चलते उनका पढ़ाई से मन हटने लगा और उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति और शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी के कारण वह घर के कामकाज तक सीमित होने लगी थीं। ऐसे में उनके स्कूल छोड़ने का खतरा बढ़ गया था।
‘टीम बालिका’ के प्रयासों से फिर लौटीं स्कूल
वर्ष 2026 में ‘एजुकेट गर्ल्स’ संस्था की ‘टीम बालिका’ ने घर-घर संपर्क अभियान के तहत श्रेया के पिता फूलचंद प्रजापति और माता शालू प्रजापति से मुलाकात की। टीम ने अभिभावकों को बालिका शिक्षा के महत्व के बारे में बताया और श्रेया को दोबारा स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रत्ना गुप्ता के सहयोग से बच्ची की शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विशेष उपचारात्मक शिक्षण सत्र शुरू करने की योजना बनाई गई।
खेल-खेल में सीखने से दूर हुआ पढ़ाई का डर
कक्षा तीन से पांच तक के उन बच्चों के लिए ‘ज्ञान का पिटारा’ कार्यक्रम संचालित किया गया, जो बुनियादी शैक्षणिक कौशल में पीछे रह गए थे। इस कार्यक्रम के तहत एक्टिविटी कार्ड, अल्फाबेट कार्ड और नंबर कार्ड के साथ खेल-आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया गया।
पारंपरिक किताबी पढ़ाई के बजाय रोचक और गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति अपनाने से बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ी। श्रेया के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण साबित हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने अक्षरों और संख्याओं को समझना शुरू किया और पढ़ाई के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा।
नियमित उपस्थिति से बढ़ा आत्मविश्वास
‘ज्ञान का पिटारा’ सत्रों में भाग लेने के बाद श्रेया की पढ़ाई में सुधार हुआ। अब वह नियमित रूप से विद्यालय जाती हैं और कक्षा की गतिविधियों में उत्साह के साथ हिस्सा लेती हैं। श्रेया ने बताया कि उन्हें जीकेपी के सत्रों में पढ़ना अच्छा लगता है और अब वह हर दिन स्कूल आती हैं।
अभिभावकों और प्रधानाध्यापिका ने की पहल की सराहना
श्रेया के माता-पिता ने ‘ज्ञान का पिटारा’ किट को अपनी बेटी के भविष्य को बेहतर बनाने में मददगार बताया। वहीं, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रत्ना गुप्ता ने ‘एजुकेट गर्ल्स’ संस्था और ‘टीम बालिका’ के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ‘ज्ञान का पिटारा’ के माध्यम से बच्चों के सीखने के स्तर में आया बदलाव सराहनीय है। श्रेया की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, अभिभावकों की भागीदारी और रोचक शिक्षण पद्धति के जरिए बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
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