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ब्रजरज उत्सव में छाया स्वदेशी का जादू, ओडीओपी और खादी उत्पादों की खरीदारी को उमड़ी भीड़

योगी सरकार की पहल से स्थानीय उत्पादों को मिला बड़ा मंच, पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइन बने आकर्षण का केंद्र

मथुरा, 28 अक्टूबर। कान्हा की नगरी में आयोजित ब्रजरज उत्सव 2026 में स्वदेशी उत्पादों, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी), खादी और ग्रामोद्योग के सामानों का आकर्षण पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोल रहा है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से आयोजित इस उत्सव में लगे विभिन्न स्टॉलों पर खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइन के मेल से तैयार उत्पाद ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं। इससे स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों को रोजगार एवं कारोबार के नए अवसर मिल रहे हैं।

ओडीओपी उत्पादों से सजे स्टॉल, स्थानीय हुनर को मिला मंच

योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ओडीओपी योजना के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पाद उत्सव में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहां आगरा के चमड़े के उत्पाद, फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां, वाराणसी की सिल्क साड़ियां, लखनऊ की चिकनकारी, कन्नौज का इत्र, मथुरा की पोशाक और कंठी माला, मुजफ्फरनगर का गुड़, प्रयागराज के मूंज उत्पाद, अलीगढ़ के ब्रास उत्पाद तथा मैनपुरी की तारकशी कला सहित कई जिलों के उत्पाद उपलब्ध हैं।

इन स्टॉलों पर हस्तशिल्प, सजावटी सामान और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार वस्तुओं की खरीदारी हो रही है। स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत का संदेश भी मजबूत हो रहा है।

खादी के परिधानों में आधुनिक फैशन की झलक

उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से उत्सव में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री के लिए 21 स्टॉल लगाई गई हैं। इन स्टॉलों पर पारंपरिक खादी के कपड़ों के साथ युवाओं की पसंद के अनुरूप आधुनिक डिजाइन के परिधान भी उपलब्ध हैं।

खादी अब केवल पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि फैशन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक बन रही है। स्वदेशी परंपरा, स्थानीय कारीगरों के हुनर और आत्मनिर्भरता से जुड़ी खादी लोगों को आकर्षित कर रही है।

मथुरा के पेड़ों और ब्रज के व्यंजनों का चटखारा

ब्रजरज उत्सव में एक जिला एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना के तहत ब्रज के पारंपरिक व्यंजनों के विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। पर्यटक मथुरा के मशहूर पेड़ों सहित स्थानीय व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं। स्वदेशी उत्पादों के साथ क्षेत्रीय खानपान की मौजूदगी उत्सव को खास बना रही है।

40 ओडीओपी स्टॉलों पर मिल रहे स्थानीय उत्पाद

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से खादी एवं ग्रामोद्योग के कुल 21 स्टॉल लगाए गए हैं। वाराणसी, मथुरा, लखनऊ, आगरा, फिरोजाबाद, एटा और मैनपुरी सहित विभिन्न जिलों के स्टॉलों पर हस्तनिर्मित आभूषण, मिट्टी के उत्पाद, हर्बल सामग्री, जैविक गुड़ और अगरबत्ती उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की खरीदारी से स्थानीय कारीगरों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।

उपायुक्त उद्योग चंद्रभान सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप ब्रजरज उत्सव में ओडीओपी और ओडीओसी उत्पादों को बड़ा मंच दिया गया है। विभाग की ओर से कुल 40 स्टॉल लगाए गए हैं। इससे स्थानीय उद्यमियों और छोटे कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए बाजार मिल रहा है और स्वदेशी उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने में मदद मिल रही है।

ब्रजरज उत्सव इस तरह स्थानीय कला, संस्कृति, खानपान और स्वदेशी उत्पादों को एक मंच पर लाकर रोजगार, पर्यटन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है।

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