गुरु गोरखनाथ का पूजन कर विजयादशमी शोभायात्रा निकालेंगे गोरक्षपीठाधीश्वर

गोरखनाथ मंदिर से मानसरोवर रामलीला मैदान तक निकलेगी पारंपरिक शोभायात्रा, प्रभु श्रीराम का करेंगे राजतिलक
मुख्य द्वार पर अल्पसंख्यक समाज के लोग करेंगे स्वागत, तिलकोत्सव में श्रद्धालुओं को देंगे आशीर्वाद
गोरखपुर, 19 अक्टूबर। विजयादशमी के पावन पर्व पर गोरखपुर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महायोगी गुरु गोरखनाथ का विधि-विधान से विशिष्ट पूजन करने के बाद शाम को पारंपरिक विजयादशमी शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे। शोभायात्रा का समापन मानसरोवर रामलीला मैदान में होगा, जहां वह प्रभु श्रीराम का पूजन कर उनका राजतिलक करेंगे।
गोरक्षपीठ की प्राचीन परंपरा के अनुसार विजयादशमी पर आयोजित होने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता और लोककल्याण की भावना का भी प्रतीक है। तुरही, नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच निकलने वाली शोभायात्रा में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे।
सुबह गुरु गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन
विजयादशमी के दिन मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का विशिष्ट पूजन करेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थापित देव विग्रहों की भी पूजा-अर्चना की जाएगी। मध्याह्न में मंदिर में पारंपरिक तिलकोत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें गोरक्षपीठाधीश्वर श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर आशीर्वाद देंगे।
शाम चार बजे निकलेगी विजयादशमी शोभायात्रा
गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार गोरक्षपीठाधीश्वर विशेष परिधान में गुरु गोरखनाथ का आशीर्वाद लेकर अपने वाहन पर सवार होंगे और शोभायात्रा की अगुवाई करेंगे। शाम चार बजे गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा तुरही, नगाड़ों और बैंड-बाजे की धुन के साथ आगे बढ़ेगी।
शोभायात्रा मानसरोवर मंदिर पहुंचेगी, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचेगी। यहां चल रही रामलीला के दौरान वह प्रभु श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण और हनुमानजी का पूजन करेंगे। इसके बाद प्रभु श्रीराम का राजतिलक और आरती की जाएगी। इस अवसर पर गोरक्षपीठाधीश्वर का संबोधन भी होगा।
शोभायात्रा का स्वागत करेंगे अल्पसंख्यक समाज के लोग
गोरखनाथ मंदिर की विजयादशमी शोभायात्रा सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल मानी जाती है। परंपरा के अनुसार मंदिर के मुख्य द्वार के पास अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शोभायात्रा के स्वागत के लिए फूल-मालाओं के साथ मौजूद रहते हैं। हर वर्ष होने वाला यह स्वागत गोरक्षपीठ की सामाजिक समरसता की परंपरा को रेखांकित करता है।
शोभायात्रा में विभिन्न वर्गों के लोगों की भागीदारी और अलग-अलग समुदायों द्वारा इसका स्वागत पूर्वांचल में आपसी सद्भाव और एकता का संदेश देता है।
देर शाम होगा पारंपरिक भोज
विजयादशमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में देर शाम पारंपरिक भोज का आयोजन भी होगा। इसमें अमीर-गरीब और जातीय भेदभाव से परे समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे। गोरक्षपीठ की यह परंपरा सामाजिक समानता, सहभागिता और लोककल्याण की भावना को मजबूत करती है।
गोरक्षपीठ में विजयादशमी का आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता को एक साथ जोड़ने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी है।
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