अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम उन्मूलन दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

समग्र विकास संस्थान ने बालश्रम, बाल विवाह और शिक्षा के महत्व पर किया जागरूक
बदायूं। अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर समग्र विकास संस्थान द्वारा क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) के सहयोग से गुरुवार को विकास खंड उसावां के ग्राम ललोमई स्थित प्राथमिक विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बालश्रम उन्मूलन, बाल अधिकारों की रक्षा तथा बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्था अध्यक्ष राजकुमार शर्मा के स्वागत एवं बैज अलंकरण के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्था की साथी कुमारी बुशरा ने बालश्रम की परिभाषा और उसके दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों से शिक्षा, खेलकूद और सामान्य विकास के स्थान पर मजदूरी या अन्य कार्य कराना बालश्रम है, जो उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में बाधक बनता है। उन्होंने बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना कानूनन प्रतिबंधित है।

संस्था साथी उमराय सिंह ने बालश्रम के प्रमुख कारणों पर चर्चा करते हुए बताया कि गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, बढ़ती जनसंख्या और जागरूकता की कमी इसके मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम में संस्था के फेसिलिटेटर गौरव कुमार ने बालश्रम के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि इससे बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाते हैं, उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास प्रभावित होता है तथा शोषण और गरीबी का चक्र लगातार बना रहता है।
संस्था समन्वयक श्रीमती साक्षी शर्मा ने बाल श्रम कानूनों की जानकारी देते हुए बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कार्य कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए भी कार्य के घंटे निर्धारित हैं और उन्हें खतरनाक कार्यों में लगाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि बालश्रम कराने पर 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्था अध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम उन्मूलन दिवस प्रत्येक वर्ष 12 जून को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बेटा-बेटी में भेदभाव न करें और दोनों को समान अवसर एवं शिक्षा उपलब्ध कराएं।
कार्यक्रम का संचालन संस्था के फेसिलिटेटर विशाल दीक्षित ने किया। इस अवसर पर हीरेंद्र सिंह, नवनीत, पिंकी, अंकना, कैलाश, संगीता, प्रदीप, सुशांत सहित गांव के लगभग 89 बच्चे तथा बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष उपस्थित रहे।
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