पीलीभीत में वोटर लिस्ट विवाद: दो एसडीएम जिला मुख्यालय से संबद्ध, कंप्यूटर ऑपरेटर पर कार्रवाई

सपा के ज्ञापन के बाद मतदाता रिकॉर्ड की जांच तेज, 13 हजार से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड की साइबर फॉरेंसिक जांच की उठी मांग
पीलीभीत, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी की ओर से ज्ञापन सौंपे जाने के बाद मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी को जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया है, जबकि वीआरसी कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित ज्ञापन में 13 हजार से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड की साइबर फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं हुई हैं। मामले में कुछ ईपीआईसी (EPIC) नंबरों पर दूसरे मतदाताओं का विवरण प्रदर्शित होने की बात सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया।
पूर्व मंत्री ने लगाए गंभीर आरोप
पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित हेराफेरी के जरिए चुनावी लाभ लेने की कोशिश की गई। उन्होंने संजय रॉयल पार्क स्थित एक आवास और एसडीएम मयंक गोस्वामी से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। सपा नेताओं ने प्रदेश सरकार में मंत्री संजय सिंह गंगवार को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

साइबर फॉरेंसिक जांच की मांग
सपा ने मतदाता रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी की तह तक पहुंचने के लिए साइबर फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। इस जांच में सर्वर लॉग, आईपी एड्रेस, लॉगिन हिस्ट्री और मतदाता विवरण में किए गए बदलावों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि रिकॉर्ड में बदलाव कब और किस प्रक्रिया के तहत हुए।
जांच के नतीजों पर टिकी नजरें
मामले में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि कथित गड़बड़ी कितने मतदाता रिकॉर्ड में हुई और इसके पीछे क्या कारण रहे। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी किस स्तर तक बनती है।
मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच, तथ्यों की सार्वजनिक जानकारी और जिम्मेदारी तय होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। फिलहाल पूरे प्रकरण में जांच के निष्कर्ष और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान सामने आने का इंतजार है।
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