महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संवार रही योगी सरकार, रामायण सर्किट से धार्मिक पर्यटन को मिलेगा विस्तार

चित्रकूट, अयोध्या और इटावा में करोड़ों रुपये की परियोजनाओं से धार्मिक स्थलों का विकास; आश्रम, घाट और पर्यटन सुविधाओं के निर्माण पर जोर
लखनऊ, 25 अक्टूबर 2026। रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संरक्षित करने और उनसे जुड़े पौराणिक स्थलों को नई पहचान दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और पर्यटन की दृष्टि से विकास किया जा रहा है। इसी क्रम में रामायण सर्किट और राम वन-गमन पथ के तहत चित्रकूट, अयोध्या और इटावा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को गति दी जा रही है।
महर्षि वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर के अवसर पर प्रदेश सरकार की इन पहलों का उद्देश्य आदिकवि की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को सहेजने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पर्यटन विभाग द्वारा महर्षि वाल्मीकि से जुड़े आश्रमों, मंदिरों, घाटों और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
करोड़ों रुपये की परियोजनाओं से संवर रही वाल्मीकि विरासत
चित्रकूट के लालापुर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यहां वित्त वर्ष 2021-22 और 2023-24 के दौरान 19.95 लाख रुपये की लागत से 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त आश्रम के विकास पर 184.95 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
आश्रम के निकट 1,120.79 लाख रुपये की लागत से पर्यटन सुविधा केंद्र का निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में लालापुर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के विकास के लिए 166.24 लाख रुपये, तमसा गंगा नदी पर वाल्मीकि घाट के निर्माण के लिए 905.08 लाख रुपये तथा वाल्मीकि आश्रम में परिक्रमा पथ और आरती स्थल के विकास के लिए 525.77 लाख रुपये की परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
इन परियोजनाओं के माध्यम से धार्मिक स्थलों के आसपास आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करने के साथ श्रद्धालुओं के लिए आवागमन, बैठने, प्रकाश और छाया जैसी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की योजना है।
अयोध्या और इटावा में भी पर्यटन विकास पर जोर
महर्षि वाल्मीकि से जुड़े अन्य धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। अयोध्या के दोस्तपुर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पर्यटन विकास के लिए 107.48 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, इटावा के बेला गांव स्थित प्राचीन वाल्मीकि मंदिर के विकास के लिए 83.17 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं।
पर्यटन विभाग की इन पहलों का उद्देश्य धार्मिक महत्व वाले स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ना और उन्हें प्रमुख पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है। परियोजनाओं के पूरा होने से श्रद्धालुओं को सुविधाजनक वातावरण मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रामायण भवन में संरक्षित है आदिकवि की साहित्यिक विरासत
अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि के योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। यहां नवनिर्मित हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया है। इसके अलावा शहर में स्थित वाल्मीकि भवन, जिसे रामायण भवन भी कहा जाता है, उनकी साहित्यिक विरासत का विशिष्ट केंद्र है।
इस भवन की दीवारों पर संस्कृत में संपूर्ण रामायण अंकित है। यह भारतीय साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा में महर्षि वाल्मीकि के अमूल्य योगदान को दर्शाता है। रामायण से जुड़े स्थलों के विकास और संरक्षण के माध्यम से अयोध्या को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आत्मबोध और संकल्प की मिसाल है महर्षि वाल्मीकि का जीवन
महर्षि वाल्मीकि का जीवन भारतीय परंपरा में आत्मबोध, साधना और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा के रूप में देखा जाता है। प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका मूल नाम रत्नाकर था। कहा जाता है कि जीवन में आत्मज्ञान प्राप्त करने के बाद उन्होंने साधना और ज्ञान का मार्ग अपनाया तथा आगे चलकर रामायण जैसे महान महाकाव्य की रचना की। इसी कारण उन्हें आदिकवि के रूप में सम्मानित किया जाता है।
उनका जीवन संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, आत्मचिंतन और ज्ञान की साधना से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। वाल्मीकि समुदाय महर्षि वाल्मीकि की जयंती को प्रगट दिवस के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाता है।
वाल्मीकि विरासत के संरक्षण से बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में रामायण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। सरकार रामायण सर्किट और राम वन-गमन पथ के माध्यम से इन स्थलों के संरक्षण, विकास और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर काम कर रही है। उन्होंने चित्रकूट को महर्षि वाल्मीकि से जुड़ी विरासत के संरक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
मंत्री के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि का जीवन आत्मबोध, ज्ञान और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है। उनसे जुड़े धार्मिक स्थलों का विकास न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार भी करेगा।
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदेश में उनकी विरासत को सहेजने के लिए किए जा रहे प्रयास भारतीय संस्कृति और रामायण परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। सरकार की इन परियोजनाओं से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करने की उम्मीद है।
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