अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट पर सियासी संग्राम तेज

लखनऊ, 12 जून। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कड़ी नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया के कुछ अकाउंट्स पर अदिति यादव के संबंध में कथित रूप से भ्रामक दावे और संपादित तस्वीरें साझा की गईं। समाजवादी पार्टी ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए आरोप लगाया कि यह अभियान उनकी छवि धूमिल करने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी नेता के परिवार और विशेष रूप से बेटियों को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद लखनऊ और अन्य जिलों में सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर शिकायतें दर्ज कराईं। पार्टी के प्रतिनिधिमंडलों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान करने और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। हजरतगंज सहित कई स्थानों पर पुलिस को ज्ञापन सौंपे गए।
विवाद बढ़ने पर कानपुर साइबर क्राइम थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई। शिकायत के आधार पर तीन लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर डिजिटल जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार वायरल पोस्ट के स्रोत, उपयोग किए गए उपकरणों और संबंधित सोशल मीडिया खातों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
इस बीच प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भाजपा समर्थकों पर इस तरह की सामग्री फैलाने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर कई नेताओं ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी बेटी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बनाने वाले अभियान लोकतांत्रिक संवाद को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि इस मामले ने केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक बहस को भी जन्म दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आखिर वायरल पोस्ट के पीछे कौन लोग थे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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