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रामकाज और सामाजिक समरसता को समर्पित रहा महंत अवेद्यनाथ का जीवन

श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत नेता और सामाजिक समरसता के अग्रदूत के रूप में सदैव याद किए जाएंगे राष्ट्रसंत

30 सितंबर को गोरखनाथ मंदिर में होगी 12वीं पुण्यतिथि की श्रद्धांजलि सभा, देशभर से संत-धर्माचार्य होंगे शामिल

गोरखपुर, 29 सितंबर। गोरक्षपीठ में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का समापन बुधवार, 30 सितंबर को होगा। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। गोरखनाथ मंदिर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होने वाली श्रद्धांजलि सभा में देशभर के संत और धर्माचार्य शामिल होंगे।

रामकाज और सामाजिक समरसता को बनाया जीवन का ध्येय

महंत अवेद्यनाथ जी महाराज का जीवन रामकाज, लोककल्याण और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित रहा। वह श्रीराम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत नेताओं में शामिल रहे। नाथपंथ की लोककल्याणकारी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई।

महंत अवेद्यनाथ का जन्म 18 मई 1919 को गढ़वाल, उत्तराखंड के ग्राम कांडी में हुआ था। धर्म और अध्यात्म के प्रति उनका बचपन से ही गहरा झुकाव रहा। गोरक्षपीठ में उन्हें महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज का सानिध्य मिला और 8 फरवरी 1942 को उन्होंने विधिवत दीक्षा ग्रहण की। वर्ष 1969 में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की चिरसमाधि के बाद वह गोरखनाथ मंदिर के महंत एवं पीठाधीश्वर बने। वर्ष 2014 में आश्विन कृष्ण चतुर्थी को उन्होंने चिरसमाधि ली।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण रहा प्रमुख मिशन

श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के आंदोलन में महंत अवेद्यनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ और उन्हें सर्वसम्मति से इसका अध्यक्ष चुना गया। वह जीवनभर समिति के अध्यक्ष रहे।

श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति और श्रीराम जन्मभूमि निर्माण उच्चाधिकार समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संतों, राजनीतिज्ञों और आमजन को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया। आगे चलकर उनके शिष्य और वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का कार्य पूर्णता की ओर पहुंचा।

सामाजिक समरसता के लिए चलाया व्यापक अभियान

महंत अवेद्यनाथ ने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ अभियान चलाया। उन्होंने दलित बस्तियों में सहभोज की परंपरा को बढ़ावा दिया और सभी वर्गों को एक साथ भोजन कर सामाजिक एकता का संदेश दिया।

काशी में डोमराजा के घर संतों के साथ भोजन कर उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। हिंदू समाज में जातिगत विभाजन और सामाजिक कुरीतियों को दूर कर एकजुटता स्थापित करना उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल रहा।

श्रीराम और मां दुर्गा के उदाहरण से देते थे एकता का संदेश

महंत अवेद्यनाथ के जीवन के शोधार्थी डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, महंत जी सामाजिक समरसता का संदेश सरल उदाहरणों के माध्यम से देते थे। वह प्रभु श्रीराम द्वारा शबरी के बेर खाने, निषादराज को गले लगाने और वनवासियों से मित्रता करने जैसे प्रसंगों के माध्यम से सामाजिक एकता की भावना समझाते थे।

इसी प्रकार देवी दुर्गा की आठ भुजाओं का उदाहरण देते हुए वह समाज के विभिन्न वर्गों की एकता को सामूहिक शक्ति का प्रतीक बताते थे।

शिक्षा के क्षेत्र में भी दिया महत्वपूर्ण योगदान

महंत अवेद्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को व्यापक स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिषद के अंतर्गत प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा, चिकित्सा, तकनीकी शिक्षा और विभिन्न सेवा संस्थानों का संचालन किया जा रहा है। इन संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

राजनीति में भी रहा लंबा सफर

महंत अवेद्यनाथ ने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने 1962, 1967, 1969, 1974 और 1977 में मानीराम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद 1970, 1989, 1991 और 1996 में गोरखपुर सदर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे।

वह अखिल भारतीय हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष और महासचिव के रूप में भी सक्रिय रहे। राजनीतिक जीवन में उन्होंने राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता, भारतीय संस्कृति, शिक्षा और हिंदू समाज की एकता जैसे विषयों को प्रमुखता दी।

30 सितंबर को होगा श्रद्धांजलि समारोह

महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में उनके धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक योगदान को स्मरण किया जाएगा। गोरक्षपीठ एवं देशभर से आने वाले संत-धर्माचार्य उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

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