कांग्रेस ने सत्र छोड़ा, बाहर बनाई समानांतर विधानसभा

हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सत्र का बहिष्कार कर दिया और सदन के बाहर समानांतर विधानसभा का आयोजन किया। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई विधायक दल की बैठक में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रही है और ऐसे विषय पर सत्र बुला रही है जो केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए यह कदम असंवैधानिक है। पार्टी ने जनता के धन के दुरुपयोग का विरोध करते हुए सत्र के दौरान मिलने वाले TA-DA लेने से भी इंकार कर दिया, जिसे राज्य के इतिहास में अभूतपूर्व बताया जा रहा है।

समानांतर सदन में कांग्रेस ने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून का समर्थन करते हुए उसे तत्काल लागू करने की मांग की और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर परिसीमन प्रक्रिया से जोड़कर इसे टालने की कोशिश कर रही है। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिलाओं के अधिकारों की पक्षधर रही है और पंचायती राज संस्थाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण से लेकर महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने तक पार्टी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ होती तो मौजूदा संसदीय संरचना में ही आरक्षण लागू किया जा सकता था। समानांतर सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों को MSP, सतलुज-यमुना लिंक नहर और बढ़ती नशाखोरी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है, लेकिन उसमें असंवैधानिक विषयों को उठाना उचित नहीं है, जबकि विधायक भारत भूषण बतरा ने परिसीमन बिल के विफल होने को सरकार की बड़ी हार बताया। विधायक अशोक अरोड़ा ने निंदा प्रस्ताव को पूरी तरह असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि इसी के विरोध में कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार किया है। कांग्रेस के इस कदम से राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह महिला आरक्षण और संवैधानिक मूल्यों के मुद्दे पर समझौता नहीं करेगी।



