लखनऊ में 23 नवंबर से सजेगा राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव, 16 राज्यों के 470 कलाकार दिखाएंगे लोक संस्कृति की झलक

150 शिल्पकारों और पारंपरिक व्यंजन विशेषज्ञों की भागीदारी प्रस्तावित, नेपाल और श्रीलंका के कलाकारों को आमंत्रित करने की तैयारी
लखनऊ, 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक शिल्प और खानपान को बढ़ावा देने के लिए 23 से 26 नवंबर 2026 तक राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में 16 राज्यों के लगभग 470 कलाकारों तथा करीब 150 शिल्पकारों और पारंपरिक व्यंजन विशेषज्ञों की भागीदारी प्रस्तावित है। महोत्सव का उद्देश्य देशभर की जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना और विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने आयोजन को भव्य स्वरूप देने तथा प्रतिभागियों की भागीदारी, आयोजन स्थलों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महोत्सव में देशभर की लोककलाओं और परंपराओं को मंच मिलेगा।
तीन स्थानों पर होंगे सांस्कृतिक आयोजन
लखनऊ में प्रस्तावित महोत्सव के लिए यूपी दर्शन पार्क, गोमती रिवरफ्रंट और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी को आयोजन स्थलों के रूप में शामिल किया गया है। यहां विभिन्न राज्यों के जनजातीय लोकनृत्य, संगीत, पारंपरिक कलाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देश की विविधता प्रदर्शित की जाएगी।
जनजातीय गौरव दिवस प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर मनाया जाता है। इसी अवसर से जुड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला में प्रस्तावित यह महोत्सव जनजातीय समुदायों की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास होगा।
16 राज्यों के कलाकार प्रस्तुत करेंगे लोककलाएं
महोत्सव में 16 राज्यों के लगभग 470 कलाकारों को शामिल करने की योजना है। इनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के लोकनृत्य, संगीत और जनजातीय परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। इसके साथ करीब 150 शिल्पकारों और पारंपरिक व्यंजन बनाने वाले विशेषज्ञों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।
आगंतुकों को जनजातीय समुदायों की जीवनशैली, पारंपरिक खानपान और पीढ़ियों से संरक्षित हस्तकला को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। आयोजन के जरिए कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने तथा उसे अधिक लोगों तक पहुंचाने का मंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
जनजातीय उत्पादों के लिए लगेंगे ट्राइफेड के 10 स्टॉल
महोत्सव में जनजातीय उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए ट्राइफेड के 10 स्टॉल लगाने का प्रस्ताव है। इन स्टॉलों के माध्यम से जनजातीय समुदायों के उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आगंतुकों को जनजातीय हस्तकला और उत्पादों को देखने का अवसर भी मिलेगा।
आयोजन के माध्यम से पारंपरिक हुनर को प्रोत्साहित करने और जनजातीय समुदायों के उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश, राजस्थान या गुजरात बन सकता है थीम राज्य
महोत्सव में किसी एक राज्य को थीम राज्य के रूप में शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के नाम सामने आए हैं। संस्कृति निदेशालय के अन्य राज्यों के साथ हुए समझौतों के माध्यम से भी उनकी भागीदारी की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
थीम राज्य के चयन से संबंधित राज्य की जनजातीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा सकेगा। साथ ही विभिन्न राज्यों के कलाकारों और सांस्कृतिक समूहों के बीच संवाद को बढ़ावा मिलेगा।
नेपाल और श्रीलंका के कलाकारों को आमंत्रित करने की तैयारी
राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए नेपाल और श्रीलंका के कलाकारों को आमंत्रित करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त आयोजन के दौरान भारत में उपलब्ध विदेशी सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं।
इस संबंध में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के साथ प्रारंभिक बातचीत हो चुकी है। प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को अंतिम रूप मिलने पर महोत्सव में भारतीय जनजातीय परंपराओं के साथ दूसरे देशों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिल सकती हैं। इससे महोत्सव का दायरा बढ़ने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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