जोमैटो से जुड़कर लखनऊ के ‘शर्मा जी की चाय’ के सालाना ऑर्डर में 7 गुना से अधिक की बढ़ोतरी

1949 में शुरू हुई चाय की दुकान आज बनी लखनऊ की खानपान संस्कृति की पहचान, 2019 में 6,984 से बढ़कर 2025 में 50,054 हुए सालाना ऑर्डर
लखनऊ, अक्टूबर 2026। अपनी खास चाय, बन मक्खन और गोल समोसे के लिए मशहूर लखनऊ के ‘शर्मा जी की चाय’ ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो के साथ जुड़ने के बाद अपने सालाना ऑर्डर में सात गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की है। वर्ष 2019 में जहां ब्रांड को 6,984 ऑर्डर मिले थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 50,054 हो गई। कंपनी के अनुसार, इस डिजिटल साझेदारी ने पारंपरिक स्वाद को नए ग्राहकों तक पहुंचाने और कारोबार के विस्तार में मदद की है।
शर्मा जी की चाय की शुरुआत वर्ष 1949 में ओम प्रकाश शर्मा ने हजरतगंज में एक छोटी-सी चाय की दुकान से की थी। समय के साथ यह दुकान स्थानीय लोगों के लिए चाय, नाश्ते और आपसी मेल-मिलाप का लोकप्रिय ठिकाना बन गई। आज शर्मा परिवार की तीसरी पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है और ब्रांड ने लखनऊ में अपने कारोबार का विस्तार भी किया है।
विरासत के साथ आधुनिक कारोबार की ओर कदम
शर्मा जी की चाय के मालिक मानव शर्मा ने कहा कि ब्रांड की पहचान अच्छी चाय, ताजा नाश्ते और ग्राहकों के साथ अपनत्व भरे रिश्तों पर आधारित रही है। उनके दादाजी ने छोटी-सी दुकान से इसकी शुरुआत की थी और ग्राहकों के प्यार तथा भरोसे ने इसे आगे बढ़ाया।
मानव शर्मा के मुताबिक, जोमैटो के साथ साझेदारी ने ब्रांड को हजरतगंज की दुकान से आगे बढ़कर नई पीढ़ी के ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर दिया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारोबार का विस्तार करने के बावजूद ब्रांड ने उन पारंपरिक स्वादों को बनाए रखने पर जोर दिया है, जो लंबे समय से उसकी पहचान रहे हैं।
जोमैटो ने बताया साझेदारी को अहम
जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने कहा कि शर्मा जी की चाय के कारोबार में हुई वृद्धि उसकी मजबूत विरासत और असली स्वाद के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जोमैटो को इस ब्रांड का साझेदार होने पर खुशी है और प्लेटफॉर्म कारोबार को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने तथा अधिक ग्राहकों तक उसके व्यंजन पहुंचाने में सहयोग कर रहा है।
1949 से आज तक कायम है खास पहचान
शर्मा जी की चाय की शुरुआत ऐसे दौर में हुई थी, जब हजरतगंज की गलियों में चाय पीने और बातचीत करने वालों की अच्छी-खासी आवाजाही रहती थी। ओम प्रकाश शर्मा ने अपनी जमा पूंजी से दुकान शुरू की थी। धीरे-धीरे यह जगह लोगों की पसंदीदा चाय की दुकानों में शामिल हो गई।
चाय के साथ परोसे जाने वाले बन मक्खन और खास गोल समोसे ने ब्रांड को अलग पहचान दिलाई। दशकों से आम ग्राहकों के साथ-साथ कई राष्ट्रीय नेताओं और मशहूर हस्तियों का भी यहां आना-जाना रहा है। पुराने स्वाद और पारंपरिक अंदाज को बनाए रखना इसकी पहचान का अहम हिस्सा रहा है।
दूसरे आउटलेट के साथ कारोबार का विस्तार
जोमैटो से जुड़ने के बाद ब्रांड ने ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाई। कंपनी के अनुसार, लखनऊ की फूड वैली में दूसरा आउटलेट शुरू करना भी कारोबार के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा। इस तरह ब्रांड ने पारंपरिक दुकान की पहचान को बरकरार रखते हुए नए ग्राहकों और बाजारों तक पहुंचने का प्रयास किया है।
छोटे रेस्तरां को डिजिटल मंच से जोड़ने की पहल
जोमैटो छोटे रेस्तरां को ऑनलाइन कारोबार से जोड़ने के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। इनमें रेस्तरां के लिए सेल्फ-रजिस्ट्रेशन टूल शामिल है, जिसके जरिए वे लगभग 15 मिनट में प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, रेस्तरां सर्विसेस हब के माध्यम से लाइसेंस, कर्मचारियों की भर्ती और साफ-सफाई से जुड़े ऑडिट के लिए सत्यापित सेवा प्रदाताओं तक पहुंच उपलब्ध कराई जाती है।
कंपनी के अनुसार, चुनिंदा शहरों में नए रेस्तरां को शुरुआती 30 दिनों के लिए शून्य कमीशन के साथ विज्ञापन और हाइपरप्योर सेवाओं के लिए क्रेडिट जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक जोमैटो के प्लेटफॉर्म पर हर महीने औसतन 3.28 लाख सक्रिय रेस्तरां पार्टनर थे।
शर्मा जी की चाय की कहानी इस बात का उदाहरण है कि पारंपरिक खानपान और डिजिटल प्लेटफॉर्म का मेल किसी स्थानीय ब्रांड को व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचने में मदद कर सकता है। 1949 में शुरू हुई छोटी-सी दुकान आज भी अपने पुराने स्वाद के साथ बदलते समय के अनुरूप कारोबार को आगे बढ़ा रही है।
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