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बेटियों के पांव पखार सीएम योगी ने की मातृशक्ति की आराधना

महानवमी पर गोरखनाथ मंदिर में नौ दुर्गा स्वरूपा कन्याओं का पूजन, अपने हाथों से भोजन परोसकर दिया उपहार व दक्षिणा

गोरखपुर, 19 अक्टूबर। शारदीय नवरात्र की महानवमी पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखनाथ मंदिर में परंपरागत कन्या पूजन किया। इस दौरान उन्होंने नौ दुर्गा स्वरूपा कन्याओं के पांव पखारे, विधि-विधान से पूजन किया और उन्हें चुनरी ओढ़ाकर आरती उतारी। मुख्यमंत्री ने कन्याओं को अपने हाथों से भोजन परोसा तथा उपहार और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने बटुक पूजन की परंपरा का भी निर्वहन किया।

पीतल की परात में पखारे कन्याओं के पांव

गोरखनाथ मंदिर के अन्न क्षेत्र के प्रथम तल स्थित भोजन कक्ष में वैदिक मंत्रोच्चार और श्रीदुर्गासप्तशती के मंत्रों के बीच कन्या पूजन संपन्न हुआ। गोरक्षपीठाधीश्वर ने पीतल की परात में जल लेकर नौ बालिकाओं के पांव धोए। इसके बाद उनके माथे पर रोली, चंदन, दही और अक्षत का तिलक लगाया। पुष्प तथा शक्तिपीठ की वेदी पर उगाए गए जौ के ज्वारे से पूजन कर उन्हें माला और चुनरी अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कन्याओं को उपहार व दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

कन्याओं और बटुकों को अपने हाथों से परोसा भोजन

पूजन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर की रसोई में तैयार भोजन-प्रसाद कन्याओं और बटुकों को अपने हाथों से परोसा। नौ कन्याओं के अतिरिक्त मंदिर पहुंचे अन्य बालिकाओं और बटुकों का भी पूजन कर आरती उतारी गई। अन्न क्षेत्र के प्रथम तल और भूतल पर कन्या भोज की व्यवस्था की गई थी। सभी कन्याओं और बटुकों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराने के बाद उपहार और दक्षिणा प्रदान की गई।

स्नेह और सत्कार का दिखा अनूठा संगम

कन्या पूजन के दौरान मुख्यमंत्री का बालिकाओं और बटुकों के प्रति स्नेह और आत्मीयता देखने को मिली। भोजन परोसते समय वह बच्चों से संवाद करते रहे और इस बात का ध्यान रखते रहे कि किसी की थाली में प्रसाद की कमी न हो। उन्होंने मंदिर की व्यवस्था से जुड़े लोगों को भी आवश्यक निर्देश दिए, ताकि सभी बच्चों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया जा सके।

कन्या पूजन के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित अनेक साधु-संत उपस्थित रहे। इससे पूर्व सोमवार सुबह मुख्यमंत्री ने मंदिर के शक्तिपीठ में मां सिद्धिदात्री की विधि-विधान से आराधना की।

गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुरूप आयोजित इस अनुष्ठान में मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा, सम्मान और सेवा का भाव प्रमुख रूप से दिखाई दिया।

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