State NewsUttar Pradesh

स्वस्थ माताएं ही स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण करती हैं: – आनंदीबेन पटेल

एकेटीयू के मां-बेटी सम्मेलन में स्वास्थ्य जागरूकता, गर्भ संस्कार और बेटियों की शिक्षा पर दिया विशेष जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के दीक्षांत समारोह के उपरांत आयोजित मां-बेटी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को छात्राओं के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार कर मासिक धर्म, मेनोपॉज, प्रजनन स्वास्थ्य एवं महिलाओं से जुड़े अन्य स्वास्थ्य विषयों की वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा छात्राओं की नियमित स्वास्थ्य जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके।

राज्यपाल ने माताओं से गर्भावस्था के दौरान सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं को तनाव, विवाद और नकारात्मक माहौल से दूर रहना चाहिए। उन्होंने अच्छा साहित्य पढ़ने, मधुर संगीत सुनने और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार नियमित व्यायाम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार ‘गर्भ संस्कार’ विषयक पुस्तक का अध्ययन छात्र-छात्राओं को भी करना चाहिए, ताकि वे भविष्य में स्वस्थ और जागरूक परिवार के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने जर्मनी के एक अस्पताल के दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां गर्भवती महिलाओं की प्रत्येक चरण में विशेष देखभाल की जाती है। उन्हें गर्भावस्था के प्रत्येक चरण के अनुसार पोषण, स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भावस्था के नौ महीनों के दौरान प्रत्येक माह आवश्यक पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और भ्रूण के विकास से संबंधित जानकारी चित्रों एवं सरल भाषा में प्रदर्शित की जाए, जिससे गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समय पर टीकाकरण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेटा और बेटी में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी दंपति को संतान प्राप्ति में कठिनाई होती है तो केवल महिला को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पुरुष की भी चिकित्सकीय जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जागरूक बेटियां अपने परिवार, माता-पिता और विवाह के बाद अपने नए परिवार को भी स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छ जीवनशैली के प्रति प्रेरित कर सकती हैं। स्वस्थ माताएं ही स्वस्थ, सक्षम और जागरूक समाज की आधारशिला होती हैं।

राज्यपाल ने गुजरात में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित महिलाओं और पुरुषों के सम्मानजनक पुनर्वास तथा उपचार की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी, जिस पर आज भी सफलतापूर्वक कार्य किया जा रहा है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि मां और बेटी के बीच निरंतर संवाद बना रहना चाहिए तथा माता को अपनी बेटी की गतिविधियों पर संवेदनशील दृष्टि रखनी चाहिए, ताकि वह किसी भी सामाजिक बुराई या गलत संगति से सुरक्षित रह सके। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श, आवश्यक दवाओं और संतुलित पोषण लेने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ माताएं ही स्वस्थ एवं सक्षम नई पीढ़ी का निर्माण करती हैं।

Advertisement…

Related Articles

Back to top button