बढ़ते कच्चे तेल के दामों से बढ़ सकती है भारत की आर्थिक चुनौती

HSBC की रिपोर्ट में FY27 में करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर 2.3% रहने का अनुमान
नई दिल्ली, 19 मई 2026:
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संस्था HSBC की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़कर GDP के 2.3 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। FY26 में यह आंकड़ा लगभग 0.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो भारत के आयात बिल पर बड़ा असर पड़ेगा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात पर निर्भर है, ऐसे में तेल कीमतों में तेजी से व्यापार घाटा और विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है।
HSBC ने यह भी अनुमान लगाया है कि FY27 में भारत का Balance of Payments (BoP) deficit बढ़कर लगभग 65 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, विदेशी निवेश में संभावित कमी और बढ़ते ऊर्जा खर्च भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को चुनौती दे सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को विदेशी निवेश बढ़ाने, व्यापार समझौतों को तेजी से लागू करने और ऊर्जा लागत को संतुलित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन लगातार वैश्विक दबाव बने रहने पर अतिरिक्त आर्थिक रणनीतियों की आवश्यकता पड़ सकती है।




