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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर CSIR-NBRI में तकनीकी नवाचारों पर विशेष व्याख्यान

CSIR-National Botanical Research Institute द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस का आयोजन के.एन. कौल ब्लॉक स्थित लोटस ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ. अश्विन काशिकर रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक डॉ. ए.के. शासनी ने स्वागत संबोधन के साथ किया। उन्होंने कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तकनीक आधारित नवाचारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि CSIR-NBRI पौध विज्ञान अनुसंधान एवं समाजोपयोगी तकनीकों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

“टेक्नोलॉजी: कल्टीवेटिंग टुमारोज हार्वेस्ट” विषय पर अपने व्याख्यान में डॉ. अश्विन काशिकर ने कृषि एवं पादप जैव प्रौद्योगिकी में उभरती तकनीकों की परिवर्तनकारी भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, जीनोमिक चयन, प्रिसिजन ब्रीडिंग एवं जीनोम एडिटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जलवायु अनुकूल एवं उच्च उत्पादकता वाली फसलों के विकास पर चर्चा की।उन्होंने बताया कि जीनोमिक चयन, स्पीड ब्रीडिंग तथा AI आधारित हाई-थ्रूपुट फीनोटाइपिंग जैसी तकनीकें फसल सुधार कार्यक्रमों को तेज गति प्रदान कर रही हैं। साथ ही CRISPR-Cas आधारित प्रिसिजन जीनोम एडिटिंग, प्राइम एडिटिंग एवं सिंथेटिक बायोलॉजी जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से पोषण गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं सतत कृषि उत्पादन में सुधार संभव हो रहा है।

व्याख्यान के दौरान डॉ. काशिकर ने कृषि में ऑटोमेशन एवं रोबोटिक्स के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि AI आधारित स्मार्ट फार्मिंग सिस्टम संसाधनों की बचत, सटीक कृषि प्रबंधन एवं श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियों के समाधान में सहायक सिद्ध होंगे।

उन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा एवं टिकाऊ कृषि के लिए मॉलिक्यूलर फार्मिंग, प्रिसिजन एडिटिंग एवं मशीन लर्निंग की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

इस दौरान उन्होंने CSIR-NBRI द्वारा विकसित जीएम कॉटन पर पिंक बॉलवर्म प्रतिरोधक क्षमता के लिए चल रहे परीक्षणों की जानकारी देते हुए इसे कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।कार्यक्रम में कीट प्रतिरोधी तकनीक, AI/ML आधारित बीज गुणवत्ता विश्लेषण, फसल इंजीनियरिंग एवं हाइब्रिड विकास जैसे नवाचारों पर भी चर्चा की गई। डॉ. काशिकर ने कहा कि ऑटोमेशन, प्रिसिजन जीन एडिटिंग एवं इंटेलिजेंट फार्मिंग सिस्टम का समन्वय आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।इस अवसर पर डॉ. पी.के. सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं विषयवस्तु पर प्रकाश डाला, जबकि अंत में डॉ. मनीष भोयर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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