किशाऊ परियोजना को मिली नई रफ्तार

अमित शाह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच हुआ समझौता; करीब छह दशक से लंबित परियोजना को मिली नई गति
नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026। लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच किशाऊ परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना ऊपरी यमुना बेसिन में जल प्रबंधन, सिंचाई, पेयजल और विद्युत उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है। टौंस यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है और इस क्षेत्र में यह हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बीच सीमा भी बनाती है। परियोजना को लेकर राज्यों के बीच लंबे समय से जल और बिजली के लाभ तथा लागत के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद राज्यों के बीच सहमति का रास्ता खुला था।

छह राज्यों के बीच तय होगा पानी और बिजली का ढांचा
समझौते के तहत किशाऊ परियोजना से जुड़े जल और विद्युत संसाधनों के उपयोग तथा लागत को लेकर राज्यों के बीच व्यवस्था तय की गई है। केंद्र सरकार परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह सहभागी राज्यों के बीच साझा किया जाएगा।
एक महत्वपूर्ण सहमति के तहत हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान के उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके बदले संबंधित राज्य हिमाचल प्रदेश की ओर से आने वाले बिजली घटक की लागत में योगदान करेंगे। इस व्यवस्था को परियोजना को लेकर वर्षों से चले आ रहे वित्तीय और जल-बंटवारे के विवाद को सुलझाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
करीब 15 हजार करोड़ रुपये की परियोजना
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। परियोजना से जल भंडारण के साथ-साथ विद्युत उत्पादन, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को बढ़ावा देने की योजना है। उपलब्ध परियोजना दस्तावेजों और रिपोर्टों के अनुसार परियोजना की विद्युत क्षमता 422 मेगावाट बताई गई है।
परियोजना के निर्माण से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को भी विभिन्न रूपों में लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे सिंचाई क्षमता बढ़ाने और पेयजल उपलब्धता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
यमुना के पुनर्जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका
केंद्र सरकार ने किशाऊ परियोजना को यमुना नदी के पुनर्जीवन से भी जोड़ा है। जून में हुई बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था कि परियोजना के क्रियान्वयन से यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस दृष्टि से परियोजना को केवल बिजली और सिंचाई की योजना के तौर पर नहीं, बल्कि यमुना बेसिन के व्यापक जल प्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है।
आठ साल से अटके गतिरोध को मिली दिशा
किशाऊ परियोजना को लेकर राज्यों के बीच वित्तीय हिस्सेदारी और लाभों के बंटवारे पर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश की ओर से परियोजना की लागत में राज्य के हिस्से को लेकर आपत्ति जताई गई थी। जून में केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच हुई बातचीत में इन मुद्दों पर समाधान का रास्ता निकला। अब एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।

परियोजना से किसानों और आम लोगों को लाभ की उम्मीद
किशाऊ परियोजना के धरातल पर आने से जल भंडारण और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। परियोजना से कृषि क्षेत्र के लिए सिंचाई क्षमता बढ़ाने के साथ विभिन्न राज्यों में पेयजल उपलब्धता को बेहतर करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा विद्युत उत्पादन से ऊर्जा क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है।
केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा काम
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार राज्यों के बीच एमओयू होने के बाद किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इससे परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़ी अगली प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।
किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों की सहमति को उत्तर भारत में जल और ऊर्जा संसाधनों के साझा उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब छह दशक से लंबित इस परियोजना के लिए मंगलवार को हुआ समझौता राज्यों के बीच समन्वय, जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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