यूपी के 75 जिलों में लागू होगी मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के किसानों और पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना’ को मंजूरी दी है। योजना का उद्देश्य पशुपालकों को उनके पशुधन से जुड़े जोखिमों से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और पशुओं की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है। योजना को प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
लघु एवं सीमांत किसानों को मिलेगा लाभ
योजना के दायरे में लघु एवं सीमांत किसान, पशुपालक तथा डेयरी संचालक शामिल होंगे। पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और बड़ी संख्या में परिवार खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे में पशुओं का बीमा होने से बीमारी, दुर्घटना या अन्य कारणों से पशु की मृत्यु होने पर होने वाले आर्थिक नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रीमियम में सरकार की बड़ी हिस्सेदारी
योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत हिस्सा लाभार्थी को देना होगा। इससे पशुपालकों के लिए पशुधन का बीमा कराना अपेक्षाकृत आसान और कम खर्चीला होगा।
पशुपालन क्षेत्र को मिलेगा सहारा
सरकार की इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पशुधन की सुरक्षा से छोटे किसानों और डेयरी संचालकों को आर्थिक स्थिरता मिल सकती है। विशेष रूप से ऐसे परिवार, जिनकी आय का बड़ा हिस्सा दूध उत्पादन और पशुपालन से जुड़ा है, उन्हें आकस्मिक नुकसान की स्थिति में बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
75 जिलों तक पहुंचाने की तैयारी
योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका प्रदेशव्यापी विस्तार है। सभी 75 जिलों को इसके दायरे में लाने से ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक पात्र पशुपालकों तक योजना का लाभ पहुंचाने की संभावना है। इससे पशुधन बीमा को लेकर जागरूकता बढ़ाने और पशुपालकों को औपचारिक बीमा व्यवस्था से जोड़ने में भी मदद मिल सकती है।
सरकार की ओर से योजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश, आवेदन प्रक्रिया और पात्रता संबंधी जानकारी जारी होने के बाद लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया और स्पष्ट होगी।
नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में योजना को 75 जिलों में लागू किए जाने की पुष्टि है, लेकिन 15 अगस्त 2026 से लागू होने की निश्चित तारीख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए प्रकाशन से पहले यदि आपके पास 15 अगस्त वाली सरकारी अधिसूचना/प्रेस रिलीज है, तो उसे आधार बनाकर तारीख जोड़ी जा सकती है।
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