AI मददगार हो, निर्णायक नहीं; तकनीक का इस्तेमाल विवेक से हो: CM योगी आदित्यनाथ

TechSangam सम्मेलन के दूसरे दिन मुख्यमंत्री का संबोधन, LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ; माफिया, न्याय व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर भी रखी बात
लखनऊ, 24 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में आयोजित TechSangam अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने LEXQ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग, मानवीय विवेक की भूमिका, प्रदेश में तकनीकी विकास और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
‘AI हमारे लिए मददगार हो, लेकिन निर्णायक नहीं’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे लिए मददगार हो सकता है, लेकिन उसे हमारे लिए निर्णायक नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI का उपयोग मानवीय विवेक के आधार पर होना चाहिए, न कि मनुष्य को पूरी तरह उसके निर्णयों पर निर्भर हो जाना चाहिए।
उन्होंने आगाह किया कि यदि मनुष्य हर काम के लिए AI पर निर्भर होने लगे और अपने विवेक का इस्तेमाल करना छोड़ दे, तो यही तकनीक भविष्य में संकट का कारण भी बन सकती है।
‘10 साल पहले यूपी में ऐसे विषय पर चर्चा सपना थी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में जिस स्तर पर तकनीक और नवाचार से जुड़े विषयों पर चर्चा हो रही है, दस वर्ष पहले प्रदेश के लिए यह किसी सपने जैसा था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में तकनीकी संस्थानों और नई क्षमताओं के विकास से ऐसे विषयों पर गंभीर विमर्श का अवसर मिल रहा है।
भू-माफिया के कब्जे से जुड़ा मामला भी उठाया
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उस भूमि का उल्लेख किया, जहां आज उत्तर प्रदेश स्टेट फोरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित है। उन्होंने दावा किया कि पहले इस जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर कर भू-माफिया ने अपने नाम दर्ज करा लिए थे और पुलिस व्यवस्था इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रही थी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने संबंधित फाइल मंगवाई और मामले की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान एफआईआर दर्ज कराई गई और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद आगे भी कानूनी कार्रवाई की गई।
42 साल बाद माफिया को सजा मिलने का किया जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के एक माफिया ने वर्ष 1980 में पहला अपराध किया था। उनके अनुसार, वर्ष 2017 में कार्रवाई शुरू होने के बाद आरोपी को पंजाब स्थानांतरित कर दिया गया था और उसे वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। उन्होंने कहा कि उसे वापस लाने में करीब तीन वर्ष लगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सजा के लिए आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे। उन्होंने कहा कि अंततः 42 वर्ष बाद उस मामले में सजा हो सकी।
न्याय में देरी से उठता है व्यवस्था पर भरोसे का सवाल
मुख्यमंत्री ने इस उदाहरण के जरिए न्याय मिलने में होने वाली देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के साथ 1980 में अपराध हुआ होगा, संभव है कि वह इतने लंबे समय बाद जीवित भी न रहा हो या न्याय व्यवस्था से उसका विश्वास उठ गया हो। उन्होंने ‘तारीख पर तारीख’ मिलने की स्थिति का उल्लेख करते हुए समय पर न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
संदेश: TechSangam सम्मेलन में मुख्यमंत्री का संबोधन तकनीक के जिम्मेदार उपयोग, मानवीय विवेक की अहमियत और प्रभावी कानून-व्यवस्था की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।
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