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बुजुर्ग महिलाओं की संपत्ति पर डॉक्टर का कब्जा, dm से न्याय की गुहार।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भूमाफिया और अवैध कब्जों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन पीलीभीत के पूरनपुर से सामने आया संपत्ति विवाद अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। करीब 915 वर्गमीटर के भवन को लेकर दो बुजुर्ग महिलाओं ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत में अस्पताल की मशीनें और फर्नीचर बेचे जाने, भवन खाली न करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने डॉ. यशपाल भाटी और डॉ. मुनीता सिंह पर आरोप लगाए हैं। अब सवाल है कि क्या प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर बुजुर्ग महिलाओं को राहत दिलाएगा?

बाइट:- रजनी अग्रवाल, शिकायतकर्ता

हमारी संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है। हमें अपने ही भवन का इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है। अस्पताल के सामान को बेचने और भवन खाली न करने जैसी शिकायतें हमने प्रशासन के सामने रखी हैं। हमारी जिलाधिकारी से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर हमें न्याय दिलाया जाए और हमारी संपत्ति सुरक्षित कराई जाए।

वी/ओ:-शिकायत पत्र के मुताबिक, संबंधित भवन में पहले जसवंत देवी मेमोरियल आई हॉस्पिटल संचालित होता था। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अस्पताल की मशीनें, फर्नीचर और अन्य सामान बेच दिया गया। उन्होंने संपत्ति पर कब्जे और भवन को नुकसान पहुंचाने की आशंका भी जताई है। मामले में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विपक्षी पक्ष का जवाब सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में प्रशासन की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बाइट:- अधिवक्ता आनंद मिश्रा

वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति और उनके अधिकारों की रक्षा कानून के तहत महत्वपूर्ण है। यदि किसी संपत्ति पर अवैध कब्जे या उसे नुकसान पहुंचाने की शिकायत है, तो संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोप प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या राजस्व अभिलेखों की जांच होगी? क्या भवन और अस्पताल के सामान से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जाएगी? और क्या बुजुर्ग महिलाओं को उनकी संपत्ति के विवाद में राहत मिल पाएगी? इन सवालों का जवाब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा। जीरो टॉलरेंस नीति की असली कसौटी यही है कि शिकायत पर निष्पक्ष जांच हो और कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

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