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चमोली में ग्लेशियर टूटने से दहशत

कंचनगंगा क्षेत्र का वीडियो वायरल, प्रशासन अलर्ट मोड पर


उत्तराखंड के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र कंचनगंगा में ग्लेशियर टूटने की घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है। घटना का वीडियो सोशल Media पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ऊंचे पहाड़ों से अचानक भारी मात्रा में बर्फ और मलबा नीचे गिरता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और यात्रियों में दहशत का माहौल बन गया।

प्रशासन द्वारा दी गई शुरुआती जानकारी के अनुसार फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि घटना के बाद जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और राहत एवं बचाव दलों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि घटना दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जिसके कारण तत्काल मौके पर पहुंचने में कठिनाई हुई। बावजूद इसके प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ड्रोन और अन्य तकनीकी माध्यमों से प्रभावित क्षेत्र की निगरानी की जा रही है ताकि किसी संभावित खतरे का समय रहते आकलन किया जा सके।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक तेज आवाज के साथ पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरने लगा। कुछ ही मिनटों में आसपास धूल और बर्फ का घना गुबार फैल गया। घटना को देखकर लोग घबरा गए और कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से इसका वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया और पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया।विशेषज्ञों ने इस घटना को जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते तापमान से जोड़कर देखा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से कमजोर हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने, हिमस्खलन और भूस्खलन जैसी घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी और अनियमित मौसम इन घटनाओं की बड़ी वजह बन रहे हैं।

गौरतलब है कि उत्तराखंड का चमोली जिला पहले भी कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है। वर्ष 2021 में भी चमोली में ग्लेशियर टूटने और अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। ऐसे में ताजा घटना ने एक बार फिर लोगों की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। साथ ही पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

चारधाम यात्रा को देखते हुए सरकार भी सतर्क हो गई है। यात्रा मार्गों और आसपास के इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में कुछ इलाकों में खराब मौसम और हल्की बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन वायरल वीडियो और लगातार सामने आ रही तस्वीरों ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते पर्यावरणीय खतरे को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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