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शनि अपनी स्वराशि कुंभ में फिर से लौट रहे, जानें शनि गोचर का सभी राशियों पर प्रभाव-

न्याय के अधिपति ग्रह शनि इस वर्ष 17 जनवरी को सायं 5.56 बजे मकर से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार कुंभ का शनि पांच राशि के जातकों के लिए कई मुश्किलें खड़ी करेगा। इन मुश्किलों का हल संकटमोचन हनुमान की आराधना से मिलेगा।

कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों पर शनि की अढ़ैया रहेगी। मकर, कुंभ और मीन राशि के जातक साढ़ेसाती के प्रभाव में रहेंगे। इन जातकों के लिए हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ और नित्य हनुमान दर्शन कल्याणकारी होगा। भृगुसंहिता विशेषज्ञ पं. वेदमूर्ति शास्त्रत्ती के अनुसार 17 जनवरी को कुंभ राशि में प्रवेश के बाद शनि 17 जून को रात्रि 10:57 बजे वक्री होकर मकर राशि में आएंगे जहां तीन नवंबर तक रहेंगे। 4 नवंबर को मार्गी होकर 31 दिसंबर तक कुंभ राशि में ही रहेंगे।

क्या है ढैया और साढ़ेसाती- कुंडली चक्र में चंद्रमा से चतुर्थ एवं अष्टम भाव में शनि का होना ढैया कहलाता है। एक राशि में शनि की स्थिति ढाई वर्ष की होती है। शनि के वक्री होने से यह बढ़ जाती है। शनि का चंद्रमा से 12वें, पहले , दूसरे भाव में आना साढ़ेसाती है। शनि सौ से 600 दिनों तक शरीर के अंगों पर प्रभाव डालता है।

शनि ग्रह गोचर का सभी राशियों पर प्रभाव-

● मेष-व्यवसाय में विस्तार, बौद्धिक विकास, जीवन साथी से तालमेल, यात्रा सुखद

● वृषभ-जीवन में अनुकूलता, पदोन्नति, शत्रु पराभूत, आय के नवीन स्रोत

● मिथुन-आरोग्य सुख, अर्थपक्ष में सफलता, स्थान परिवर्तन, व्यक्तित्व विकास और स्वाध्याय में रुचि

● कर्क-निराशा, विश्वासघात की आशंका, नवीन समस्याएं, क्रोध और स्वास्थ्य में शिथिलता

● सिंह-सफलता के योग, मांगलिक आयोजन, प्रेम-सम्बन्धों में प्रगाढ़ता और भौतिक सम्पन्नता

● कन्या-आप के नवीन स्रोत, व्यक्तित्व विकास, स्वास्थ्य में सुधार और पुराने विवाद का खात्मा

● तुला-अनुकूलता, पदोन्नति, आय के नए स्रोत, संतान कष्ट, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि और सुदूर यात्रा

 वृश्चिक- शुभता में कमी, प्रतिकूल घटनाएं, क्रोध, गलतफहमी और आलस्य की अधिकता

● धनु-कार्यों में सफलता, प्रियजनों से सहयोग, कर्ज से मुक्ति और प्रतियोगिता में सफलता

● मकर-व्यापारिक अड़चनें, स्वास्थ्य में शिथिलता, लेन-देन में जोखिम और स्वजनों से कष्ट

● कुंभ-पुरुषार्थ के प्रति अरुचि, मानसिक कष्ट, उपलब्धि में विलंब एवं विश्वासघात का संकट

● मीन-आर्थिक परेशानी, व्यय अधिक, निर्णय अनिर्णय की स्थिति

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