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टैरिफ विवाद पर अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला

29 अगस्त 2025 | वॉशिंगटन

संघीय अपीलीय अदालत ने ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ को अवैध करार दिया

अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत (Federal Appeals Court) ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया। अदालत ने कहा कि ट्रम्प ने 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का दुरुपयोग करते हुए राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर ऐसे टैरिफ लगाए, जो उनके संवैधानिक अधिकार से परे थे।

यह फैसला 7–4 के बहुमत से दिया गया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि IEEPA कानून में राष्ट्रपति को टैरिफ, कर या किसी प्रकार की ड्यूटी लगाने का अधिकार नहीं दिया गया है

हालांकि अदालत ने यह फैसला तुरंत लागू करने से इनकार किया। आदेश में कहा गया है कि इस पर अमल 14 अक्टूबर 2025 से शुरू होगा, ताकि ट्रम्प प्रशासन के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अवसर हो।

कानूनविदों का मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट भी इसी लाइन पर चलता है, तो यह फैसला आने वाले वर्षों में अमेरिकी व्यापार नीति को पूरी तरह बदल सकता है।

ट्रम्प प्रशासन ने IEEPA के तहत घोषित “राष्ट्रीय आपातकाल” का हवाला देते हुए चीन, भारत और यूरोप सहित कई देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए थे। उद्देश्य यह बताया गया कि अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करनी है।
लेकिन अदालत ने माना कि IEEPA का मकसद केवल आर्थिक प्रतिबंध (sanctions) या संपत्ति फ्रीज करना था, न कि व्यापक स्तर पर व्यापार शुल्क थोपना।

इस फैसले से अमेरिकी व्यापारिक रिश्तों और वैश्विक बाज़ारों पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत सहित कई देशों ने पहले ही इन टैरिफ के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) और द्विपक्षीय मंचों पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

  • कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रपति की शक्तियों पर “एक बड़ी लगाम” है और आने वाले वर्षों में व्हाइट हाउस को व्यापार नीति पर सीमाएं तय करनी होंगी।
  • अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैरिफ हटने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश को नई गति मिल सकती है।

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