गुरु पूर्णिमा का पावन दिवस आज

गुरु पूर्णिमा का पावन दिवस अर्थात ईश्वर के समकक्ष पदवी धारण करने वाले गुरु के प्रति नतमस्तक होने, उनकी अनन्त महानता का स्मरण करने का दिन गुरु के प्रति श्रद्धा व समर्पण का पर्व है। आज राष्ट्र को ज्ञानवान, प्रकाशवान व शक्तिवान बनाने के लिए चिर प्राचीन गुरु शिष्य परंपरा की पुनरावृत्ति की नितांत आवश्यकता है गुरु के मार्गदर्शन के अभाव में सुखानुभूति तो दूर शांतिमय जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। आत्मा की ज्ञानपीपासा को अधिक दिनों तक भुलाया नहीं जा सकता, गुरु पर्व उसे जगाने का शुभ अवसर है। त्रिकाल का एक सूक्ष्मतम पल और त्रिलोक का सूक्ष्मतम कण गुरु की महिमा से अभिभूत है।
गुरुर्ब्रम्हा गुर्रविष्णु गुर्रुदेवो महेश्वरा: गुर्रुसाक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः
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