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अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों से प्रो. देवासिस प्रधान की शोध पुस्तकों को वैश्विक मान्यता

स्कोपस और वेब ऑफ साइंस में इंडेक्सिंग, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

नई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को वैश्विक स्तर पर सशक्त करते हुए आचार्य संस्थान के सहायक निदेशक (अनुसंधान) एवं वरिष्ठ शोधकर्ता प्रो. देवासिस प्रधान द्वारा संपादित और सह-संपादित कई शोध पुस्तकों को विश्व के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों ने प्रकाशित किया है। इन पुस्तकों को Scopus तथा Web of Science जैसे वैश्विक इंडेक्सिंग प्लेटफॉर्म्स में स्थान प्राप्त हुआ है, जो भारतीय शोध की गुणवत्ता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।

ये शोध कृतियाँ Wiley, Springer, CRC Press (टेलर एंड फ्रांसिस समूह), Cambridge Scholars Publishing, Bentham Science तथा IGI Global जैसे अग्रणी प्रकाशन समूहों द्वारा प्रकाशित की गई हैं। इससे भारतीय अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और वैश्विक मंच मिला है।

प्रो. प्रधान के नेतृत्व में तैयार इन पुस्तकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, संज्ञानात्मक कंप्यूटिंग, 5जी एवं 6जी संचार, स्मार्ट सिटीज़, नेटवर्क सुरक्षा, हरित संचार नेटवर्क, सतत स्वास्थ्य प्रणालियाँ, निर्णय विश्लेषण और उन्नत कंप्यूटेशनल तकनीकों जैसे समकालीन विषयों पर गहन शोध प्रस्तुत किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये विषय न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि डिजिटल इंडिया, तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्मार्ट अवसंरचना विकास के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं।

इस अवसर पर प्रो. देवासिस प्रधान ने कहा कि इन प्रकाशनों का उद्देश्य भारतीय अनुसंधान क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप ज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को देश के विकास से जोड़ना है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन पुस्तकों से नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और उच्च शिक्षण संस्थानों को व्यावहारिक एवं शोध-आधारित मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

इन शोध कार्यों में वर्षा उमेश घाटे, सचिन कदम, उमेश घाटे, अनुपम मुखर्जी, अनिता सरदार पाटिल, बी. सहाना, धनुष प्रभाकर, सी.एस. मेघना, बी. साधना, राकेश कुमार दीक्षित, पुष्पेंद्र पाल सिंह, प्रभाकर रथ, स्मिता रानी परिजा, किशन गुप्ता, प्रसन्ना कुमार साहू, एलेस्सांद्रो ब्रूनो, एम. क्लेमेंट जो आनंद, वी.ए. अंजना, मनोरचना अग्रवाल, उत्पल सैकिया, बी. रंजीथा, चित्रा रामप्रकाश, ए.पी. पुष्पलता, वाई. मोनिकर्चना, साक्षी तारेष खन्ना, सुलभा रावरेन, शीला एस. महाराजपेट, मनीष कुमार ठाकुर, एस. चिरंजीवी, एन. अनिता, ए. मंशाथ, शेख मोइनुद्दीन इमरान, मोहित तिवारी सहित अनेक शोधकर्ताओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।

यह उपलब्धि आचार्य संस्थान की सुदृढ़ शोध संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

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