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“आबकारी विभाग के राजस्व में लगातार वृद्धि: पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों का प्रभाव”

उत्तर प्रदेश शीरा और इथेनॉल उत्पादन करने वाला सबसे बड़ा प्रदेश यूपी है पूरे देश में।।
यूपी इन्वेस्टर समिट हुआ था तब 147 MOU किए थे आबकारी विभाग ने 30708 करोड़ की कुल वैल्यू थी। और इसके साथ कुछ छोटे कॉन्ट्रैक्ट्स डिस्टिलरी में और 20296 करोड़ के प्रपोजल आए थे।
और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए 46 प्रोजेक्ट रेडी हैं जिसमे कुल निवेश 7888.73 करोड़ हैं जिससे 10,957 करोड़ रोज़गार मिलेंगे।
3 सालों में आबकारी विभाग से जुड़ी हुई कोई घटना नहीं हुई, पुर प्रदेश में प्रवर्तन को मजबूत किया जिसकी वज़ह से कहीं कोई भी जहरीली शराब की घटना नहीं सामने आई।
प्रवर्तन को मजबूत करने के लिए प्रदेश को 2 भागों में बटा गया।

प्रदेश में 6 विशेष प्रवर्तन के अभियान चलाए जिसमे 27108 अभियोग लिखे और 7.04 लाख अवैध मदिरा सीज़ करी और जिसमे 6010 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया और 1380 वक्तियों को जेल भेजा। हमने चोरी को रोकने के किए पूरे सिस्टम को ऑनलाइन किया और इस प्रक्रिया को कहते हैं Integrated Command and Control Centre। मदिरा वाहनों में जीपीएस और डिजिटल लॉक लगाया और शराब की बिक्री पॉज़ मशीन से करी जा रही और सभी पत्रावली को डिजिटल किया है।

पिछली सरकारों में आबकारी विभाग में जो लूट का साम्राज्य था उस ख़त्म किया पिछली सरकारों में आबकारी का पैसा माफिया के पास जाता था लेकिन अब सीधा राजस्व में आता है।

हम लोग को जो बजट मिलता है वो राजस्व का एक प्रतिशत होता है जिसे विभाग में लगाया जाता है। हमारे कई ज्वाइंट कमिश्नर रिटायर हो रहे हैं रिटायरमेंट के साथ हमारे नए न्युक्त होंगे।

हमारा जो राजस्व आता है उसमे 40 प्रतिशत देसी मदिरा से आता है और बाकी 60 प्रतिशत अंग्रज़ी शराब,वाइन से आता है।

इस बार हमलोग ने सीएम योगी से बात करके जो हमारे स्टेट बॉर्डर हैं उसपर हमने अपने डिपार्टमेंट की स्पेशल टीम तैनात करी है जिसमे clearly बताया गया है की किसी भी प्रदेश से अवैध मदिरा नहीं आएगी और हम नए scanners procure करने वाले हैं जिससे अवैध मदिरा पता चल जाएगी और में पूरी ज़िमेदारी से कहना चाहूंगा कि यूपी से बिहार में मदिरा की तस्करी नहीं हो रही और ना ही किसी प्रदेश से यहां आ रही।

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