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4,000 करोड़ के कागजी साम्राज्य का भंडाफोड़, 14 सरकारी बैंकों को लगाया चूना

लखनऊ में शुक्रवार को वकीलों की एक टीम द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के बैंकिंग इतिहास के एक बड़े घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ। वकीलों ने करीब 4,000 करोड़ रुपये के उस ‘कागजी साम्राज्य’ को बेनकाब किया, जिसने देश के 14 सरकारी बैंकों को हिलाकर रख दिया।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एडवोकेट विवेक राय, सजीत सिंह और हरजीत सिंह ने बताया कि मुख्य आरोपी राजेश बोथरा और उसके फ्रॉस्ट ग्रुप ने बिना किसी वास्तविक व्यापार के, केवल जाली दस्तावेजों और फर्जी कंपनियों के सहारे बैंकों से भारी-भरकम कर्ज हासिल किया। जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क कागजों पर खड़ा किया गया था, जिसका जमीनी स्तर पर कोई अस्तित्व नहीं था।

वकीलों के अनुसार, घोटाले की रकम को 36 शेल कंपनियों के माध्यम से घुमाया गया और फिर दुबई में फ्लैटों की खरीद के जरिए पैसे को विदेश भेजकर दोबारा सफेद किया गया। इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चुप्पी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की धीमी जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।

इस मामले में आज की सबसे बड़ी खबर यह है कि लखनऊ की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने मुख्य आरोपी राजेश बोथरा की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले को मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है।

वकीलों ने आरोप लगाया कि सिस्टम की मिलीभगत और निगरानी की कमी के चलते जनता की गाढ़ी कमाई को लूटा गया। उन्होंने मांग की कि इस घोटाले की निष्पक्ष और तेज़ जांच कर दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसे आर्थिक अपराधों पर रोक लग सके।

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