‘संजीवन’ पहल: श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्वच्छ वायु के लिए जिंदल स्टेनलेस–अमीदा की साझेदारी

प्रति घंटे 3 लाख घन मीटर से अधिक वायु शुद्ध करने की क्षमता, मणिकर्णिका घाट क्षेत्र पर विशेष फोकस
लखनऊ/वाराणसी। भारत की अग्रणी स्टेनलेस स्टील निर्माता Jindal Stainless ने ‘संजीवन’ पहल के तहत Shri Kashi Vishwanath Dham Authority के सहयोग से श्री काशी विश्वनाथ धाम (एसकेवीडी) परिसर के रैम्प भवन में उन्नत, स्वदेशी एयर प्यूरीफिकेशन प्रणाली स्थापित करने की घोषणा की है। इस परियोजना में ऐतिहासिक Manikarnika Ghat क्षेत्र भी शामिल है। कंपनी के अनुसार, यह उसकी अब तक की सबसे बड़ी सीएसआर परियोजना है।
यह पहल Amida Cleantech Private Limited (AMIDA) के सहयोग से लागू की जा रही है। अमीदा की अट्रेक्ट–कैप्चर–एलिमिनेट (ACE+) तकनीक के माध्यम से कुल 58 स्टेनलेस स्टील वायु शुद्धिकरण इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी, जिनकी संयुक्त क्षमता प्रति घंटे 3,00,000 घन मीटर से अधिक हवा को शुद्ध करने की होगी। परियोजना को श्री काशी विश्वनाथ धाम प्राधिकरण से स्वीकृति मिल चुकी है और यह Ministry of Environment, Forest and Climate Change द्वारा संचालित National Clean Air Programme के अनुरूप है।
परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार स्थल के निकट स्थित रैम्प भवन में विशेष वायु शोधन प्रणाली लगाई जाएगी, ताकि जलती चिताओं से उत्पन्न प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके और मंदिर के मुख्य गलियारे में प्रदूषित कणों को कम किया जा सके। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं, पुजारियों और स्थानीय निवासियों के लिए स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना है, साथ ही एसकेवीडी परिसर की इमारतों की बाहरी सतह को प्रदूषण से होने वाले नुकसान को भी कम करना है।
एमओयू हस्ताक्षर समारोह में जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा (पीसीएस) तथा अमीदा के प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ दीक्षित उपस्थित रहे। कंपनी ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी सतत प्रतिबद्धता का हिस्सा है और नवोन्मेषी भारतीय तकनीक के समर्थन का प्रतीक है।
अमीदा क्लीनटेक के अनुसार, उसकी ACE+ तकनीक हवा में मौजूद नैनो ब्लैक कार्बन, पराग कण, 100 नैनोमीटर से 50 माइक्रॉन तक के कणों, सल्फर ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी विषैली गैसों के साथ-साथ वायरस और बैक्टीरिया को भी निष्क्रिय करने में सक्षम है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में पेटेंट प्राप्त है तथा विभिन्न सार्वजनिक स्थलों—जैसे पार्क, मेट्रो स्टेशन, बस शेल्टर और हेरिटेज स्थलों—पर सफलतापूर्वक उपयोग की जा चुकी है।
कंपनी प्रोफाइल
जिंदल स्टेनलेस का वित्त वर्ष 2025 में वार्षिक कारोबार 40,182 करोड़ रुपये (लगभग 4.75 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा। कंपनी 2027 तक अपनी वार्षिक मेल्ट क्षमता 4.2 मिलियन टन तक बढ़ाने की दिशा में कार्यरत है। भारत सहित स्पेन और इंडोनेशिया में इसकी 16 विनिर्माण एवं प्रसंस्करण इकाइयाँ हैं तथा 12 देशों में वैश्विक नेटवर्क संचालित है। 1970 में स्थापित कंपनी पर्यावरणीय जिम्मेदारी और हरित, टिकाऊ भविष्य पर केंद्रित है तथा इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस में स्क्रैप आधारित उत्पादन के माध्यम से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने पर बल देती है।
स्थानीय प्रशासन ने पर्यावरण सुधार और जनस्वास्थ्य के हित में इस पहल की सराहना की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘संजीवन’ परियोजना धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक मॉडल साबित हो सकती है।


