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आईसीएआर-आईवीआरआई, इज्जतनगर में 21 दिवसीय शीतकालीन विद्यालय का शुभारंभ, डिजिटल व स्मार्ट कृषि पर जोर

बरेली, 16 जनवरी:
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा प्रायोजित “डिजिटल विस्तार एवं स्मार्ट कृषि में नवाचार” विषय पर 21 दिवसीय शीतकालीन विद्यालय का औपचारिक उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई), इज्जतनगर में गरिमामय एवं अकादमिक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर से आए कृषि एवं पशु चिकित्सा क्षेत्र के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की उपस्थिति ने इसे विशेष महत्व प्रदान किया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. अजीत सिंह यादव, सहायक महानिदेशक (ईक्यूएआर), कृषि शिक्षा प्रभाग, आईसीएआर ने अपने संबोधन में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में मानव संसाधन विकास को सशक्त बनाने पर जोर देते हुए स्नातक एवं स्नातकोत्तर कृषि शिक्षा से जुड़ी विभिन्न आईसीएआर नीतियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पशुपालन क्षेत्र में रोगों की समय रहते पहचान, किसानों तक त्वरित सूचना प्रसार, निवारक रणनीतियों और हितधारकों के साथ निरंतर संवाद को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि समय पर जागरूकता से रोगजनित नुकसान को कम कर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है।

डॉ. यादव ने कृषि शिक्षा में हो रहे सुधारों, गुणवत्ता आश्वासन तंत्र तथा प्रसार शिक्षा में डिजिटल नवाचारों के प्रभावी एकीकरण पर प्रकाश डालते हुए स्मार्ट फार्मिंग, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) और डेटा विश्लेषण को किसान-केंद्रित परामर्श सेवाओं के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा सुधार, नीति निर्माण और अनुसंधान प्रबंधन के अपने अनुभव साझा करते हुए प्रतिभागियों को बदलते कृषि परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसीएआर-आईवीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और आईसीएआर संस्थानों के निदेशकों तथा कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के प्रति आभार जताया, जिन्होंने इस आईसीटी-आधारित शीतकालीन विद्यालय के लिए अपने संकाय सदस्यों को नामित किया। उन्होंने कृषि प्रसार में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और डिजिटल रूपांतरण को सतत विकास की कुंजी बताया तथा आईसीएआर-आईवीआरआई की 136 वर्षों की गौरवशाली विरासत और राष्ट्रीय सेवा में इसके योगदान पर प्रकाश डाला।

शीतकालीन विद्यालय की पाठ्यक्रम निदेशक एवं संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रुपसी तिवारी ने स्वागत भाषण में बताया कि इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्य कृषि एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों से कुल 21 प्रतिभागी सहभागिता कर रहे हैं, जिनमें सहायक प्राध्यापक, वैज्ञानिक और विषय-वस्तु विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट फार्मिंग समाधान कृषि एवं पशुपालन विस्तार सेवाओं को नई दिशा दे रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ई-एक्सटेंशन, सोशल मीडिया, ब्लॉग, पॉडकास्ट, फोटोग्राफी-वीडियो आधारित विस्तार, एआई, बिग डेटा, ड्रोन, आईओटी, ब्लॉकचेन और एआर/वीआर जैसी उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का समापन पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. बबलू कुमार द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन एवं सामूहिक छायाचित्र के साथ हुआ, जिसने शीतकालीन विद्यालय की सफल और उत्साहपूर्ण शुरुआत को रेखांकित किया।

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