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मनरेगा मजदूरों का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है – स्वामी प्रसाद मौर्य

लखनऊ। अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और राज्य सरकार पर मनरेगा मजदूरों की उपेक्षा और शोषण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस मनरेगा योजना को ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया था, वह आज भ्रष्टाचार और उपेक्षा की भेंट चढ़ गई है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा –

  • “भारत सरकार लगातार मनरेगा मजदूरों के बजट में कटौती कर रही है, जबकि मजदूरों की संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है।”
  • “देश के 27 करोड़ मजदूरों में से केवल 12 करोड़ लोगों को ही रोजगार मिल रहा है।”
  • “मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल रही है। श्रम विभाग जहां न्यूनतम मजदूरी तय करता है, वहीं मजदूरों को मात्र ₹252 प्रतिदिन दिया जा रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि कम मजदूरी मिलने और समय पर भुगतान न होने के कारण ग्रामीण मजदूर मनरेगा में काम करने के बजाय दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर हैं।

मौर्य ने कहा –

  • “मनरेगा मजदूरी तत्काल नहीं मिलती। मजदूरों को 4 से 8 महीने बाद तक भुगतान किया जाता है, जिससे उनका बड़ा शोषण हो रहा है।”
  • “जहां मजदूरों को काम मिलना चाहिए, वहां प्रधान जेसीबी मशीनों से काम करा कर पैसे का बंदरबांट करते हैं।
  • “उत्तर प्रदेश में भी मजदूरों को 6–6 महीने बाद मजदूरी मिल रही है और उन्हें उनका पूरा हक नहीं दिया जा रहा है।”

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार को तत्काल इस दिशा में कदम उठाकर मजदूरों को उचित मजदूरी, समय पर भुगतान और काम का वास्तविक अधिकार सुनिश्चित करना चाहिए।

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