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9 साल बाद भी शराबबंदी अडिग, नीतीश का संकल्प मजबूत

5 अप्रैल 2025 को बिहार में शराबबंदी के 9 साल पूरे होने जा रहे हैं। यह नीति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे चर्चित और विवादास्पद पहलों में से एक रही है, जिसे उन्होंने 2016 में लागू किया था। इस फैसले को लेकर जहां एक ओर समर्थन की आवाजें उठीं, वहीं दूसरी ओर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा।

शराबबंदी की शुरुआत: एक ऐतिहासिक कदम

5 अप्रैल 2016 को बिहार में शराबबंदी लागू हुई। नीतीश कुमार ने इसे सामाजिक सुधार के एक बड़े कदम के रूप में पेश किया, जिसका मकसद गरीब परिवारों को शराब की लत से बचाना, घरेलू हिंसा को कम करना और महिलाओं व बच्चों के जीवन को बेहतर बनाना था। इस नीति के पीछे उनकी प्रेरणा महात्मा गांधी के विचार थे, जो शराब को सामाजिक बुराई मानते थे।

डेटा जो बताता है शराबबंदी की सफलता

शराबबंदी के 9 साल बाद इसके प्रभाव को समझने के लिए कई आंकड़े और सर्वे उपलब्ध हैं। बिहार सरकार के मद्य निषेध विभाग और अन्य स्वतंत्र अध्ययनों से मिले डेटा इस नीति के सकारात्मक पहलुओं को उजागर करते हैं।

  1. शराब की खपत में कमीं

बिहार में शराबबंदी से पहले सालाना शराब की खपत लगभग 1000 करोड़ रुपये की थी। शराबबंदी के बाद यह अवैध बाजार में सिमट गई, और वैध खपत शून्य हो गई।

प्रभाव: एक सर्वे (चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और जीविका, 2023) के अनुसार, 70% से अधिक परिवारों ने माना कि शराब की अनुपस्थिति से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।

  1. घरेलू हिंसा में कमी

डेटा: बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, शराबबंदी से पहले 2015 में घरेलू हिंसा के 15,000 से अधिक मामले दर्ज हुए थे, जो 2020 तक घटकर 9,000 के आसपास रह गए। 2024 तक यह संख्या और कम होकर 7,500 के करीब पहुंची।

प्रभाव: महिलाओं ने शराबबंदी को अपने जीवन में सबसे बड़ा बदलाव बताया। एक सर्वे में 82% महिलाओं ने कहा कि उनके पति अब शराब नहीं पीते, जिससे घर में शांति बढ़ी।

  1. आर्थिक बचत और उत्पादकता

डेटा: बिहार सरकार के दावे के अनुसार, शराबबंदी से हर साल औसतन 5,000 करोड़ रुपये की बचत परिवारों के पास रही। यह पैसा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों पर खर्च हुआ।

प्रभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में दूध, सब्जियों और अन्य जरूरी सामानों की खपत में 20-25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  1. अपराध दर में कमी

डेटा: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, शराब से जुड़े अपराध (नशे में मारपीट, दुर्घटना आदि) 2015 के 12,000 मामलों से घटकर 2021 में 3,000 के आसपास रह गए। 2024 तक यह और कम हुआ।

प्रभाव: शराबबंदी ने नशे से प्रेरित अपराधों को नियंत्रित किया, जिससे सामाजिक सुरक्षा बढ़ी।

जहरीली शराब से मौतों पर नियंत्रण

डेटा: शराबबंदी से पहले जहरीली शराब से होने वाली मौतें एक बड़ी समस्या थीं। 2016 के बाद कुछ घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने सख्ती से कार्रवाई की। 2016-2024 के बीच ऐसी घटनाओं में 200 से कम मौतें हुईं, जो पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम हैं।

प्रभाव: नीतीश सरकार ने अवैध शराब के खिलाफ 6.5 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया और 147 लाख लीटर शराब जब्त की।

नीतीश कुमार का विजन: महिलाओं और समाज का उत्थान

नीतीश कुमार ने शराबबंदी को महिलाओं के हित से जोड़ा। 2015 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने उनके इस वादे का समर्थन किया था। 9 साल बाद भी उनका यह फैसला महिलाओं के बीच लोकप्रिय है।

महिलाओं की आवाज

इससे उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हुआ

प्रभाव: महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी। जीविका समूहों के जरिए 10 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं।

सामाजिक जागरूकता

नीतीश ने शराब के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाए। 2025 में उनकी प्रस्तावित बिहार यात्रा इस दिशा में एक और कदम होगी।

आलोचनाओं का जवाब: डेटा से सच्चाई

शराबबंदी की आलोचना करने वाले इसे विफल बताते हैं, लेकिन डेटा और तथ्य इसके उलट कहानी कहते हैं।

  1. अवैध शराब का कारोबार

आलोचना: कहा जाता है कि शराबबंदी से अवैध कारोबार बढ़ा।
जवाब: सरकार ने 90 बड़े शराब माफियाओं को पकड़ा और सप्लाई चेन तोड़ी। 2024 में अवैध शराब की बरामदगी 50% कम हुई।

  1. राजस्व का नुकसान

आलोचना: शराबबंदी से 6,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जवाब: बिहार की जीडीपी 2016 के 4.14 लाख करोड़ से 2024 में 8 लाख करोड़ के पार पहुंची। शराब से होने वाली आय की भरपाई अन्य क्षेत्रों से हुई।

आलोचना: जहरीली शराब से मौतें हुईं।
जवाब: ऐसी घटनाएं शराबबंदी से पहले भी थीं। नीतीश ने सख्त कानून और त्वरित कार्रवाई से इसे नियंत्रित किया।

शराबबंदी का भविष्य: 9 साल का सबक

9 साल बाद शराबबंदी बिहार की पहचान बन चुकी है। नीतीश कुमार का यह फैसला न केवल सामाजिक सुधार का प्रतीक है, बल्कि एक साहसिक राजनीतिक कदम भी है। डेटा और जनता की राय इसे सही साबित करते हैं।

“शराबबंदी का नौवां साल, बिहार का नया हाल।”

शराबबंदी के 9 साल पूरे होने पर यह साफ है कि नीतीश कुमार का यह फैसला बिहार के लिए एक वरदान साबित हुआ। डेटा बताता है कि इससे न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी, बल्कि सामाजिक बुराइयां भी कम हुईं। महिलाओं और बच्चों के जीवन में आए बदलाव इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। आलोचनाओं के बावजूद, नीतीश ने इसे लागू रखकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई। 5 अप्रैल 2025 को यह नीति न सिर्फ एक कानून के रूप में, बल्कि बिहार के नवनिर्माण के प्रतीक के रूप में याद की जाएगी।

मद्यनिषेध एवं उत्पाद विभाग (शराबबंदी से संबंधित आंकड़े)

चेक पोस्ट, थाने और निगरानी

  • कुल चेक पोस्ट: 84 (67 अंतर्राज्यीय)
  • सभी 24×7 कार्यरत, CCTV से लैस

30 उत्पाद थाने कार्यरत

  • संसाधन: ड्रोन, मोटर बोट, दूरबीन, स्नीफर डॉग, ब्रेथ एनालाईजर, ड्रम कटर, हैन्ड हेल्ड स्कैनर
  • अवधि: 01.01.2023 – 31.03.2025 (चेक पोस्ट)
  • उत्पाद अभियोग: 1,20,409
    गिरफ्तारियां: 2,15,917

जब्त शराब:

देशी: 2,35,422 बल्क लीटर

विदेशी: 6,22,646 बल्क लीटर
जब्त वाहन: 7,898

ड्रोन से छापामारी (जनवरी 2022 – 31.03.2025)
कार्यरत ड्रोन: 
42

छापेमारी: 1,18,668
अभियोग: 3,422

गिरफ्तार: 1,842
जब्त शराब: 23,81,423 बल्क लीटर

जब्त वाहन: 75
विनष्ट जावा/गुड़: 2,581.97 लाख किलोग्राम

मोटर बोट से छापेमारी (फरवरी 2022 – मार्च 2025)
कार्यरत स्पीड बोट: 6, इनफ्लेटेबल बोट: 6
छापेमारी: 64,904

अभियोग: 1,553
गिरफ्तार: 1,030
जब्त शराब: 8,60,394 लीटर
विनष्ट जावा: 876.19 लाख किलोग्राम

अवधि: 01.04.2016 – 31.03.2025 (समग्र शराबबंदी आँकड़े)
कुल उत्पाद अभियोग: 9,36,949

विभाग द्वारा: 4,24,852
पुलिस द्वारा: 5,12,097
गिरफ्तार: 14,32,837

विभाग द्वारा: 6,18,134
पुलिस द्वारा: 8,14,703

जब्त शराब:

देशी: 1,76,31,986 बल्क लीटर
विदेशी: 2,10,64,584 बल्क लीटर

कुल: 3,86,96,570 बल्क लीटर
विभाग: 1,18,16,288 बल्क लीटर
पुलिस: 2,68,80,282 बल्क लीटर

विनष्टीकरण

कुल जब्त शराब में से 97% (3,77,28,713 बल्क लीटर) विनष्ट
वाहन जब्ती, नीलामी, पेनाल्टी
जब्त वाहन: 1,40,279

विभाग: 32,284
पुलिस: 1,07,995
नीलाम वाहन: 74,725 → 340.55 करोड़ ₹ प्राप्ति

पेनाल्टी पर मुक्त वाहन: 17,163 → 81.41 करोड़ ₹ प्राप्ति
भवन/भूखंड जब्ती
जब्त: 8,268
पेनाल्टी पर मुक्त: 584 → 8.23 करोड़ ₹ प्राप्ति

तकनीकी उपकरण

  • स्नीफर डॉग: 33
  • ब्रेथ एनालाईजर: 890
  • हैंड हेल्ड स्कैनर: 12

कॉल सेंटर

  • कॉल्स: पहले 70–80, अब 300–400 प्रति दिन
  • ट्रायल (01.04.2016 – 31.03.2025)
  • कुल वाद: 9,36,949
  • निष्पादित: 4,18,954 (45%)
  • सजा: 4,16,097 (99%)

नीरा संवर्धन योजना (2025-26 सीजन)
अवधि: अप्रैल–जुलाई (65 दिन)
ताड़ के पेड़: 2 लाख
नीरा उत्पादन लक्ष्य: 3.9 करोड़ लीटर
टैपर्स: 20,000

प्रोत्साहन राशि

टैपर: ₹8/लीटर, अधिकतम ₹195/पेड़

पेड़ मालिक: ₹3/लीटर, अधिकतम ₹195/पेड़

टैपर को 10 पेड़ पर: ₹15,600
पेड़ मालिक को 10 पेड़ पर: ₹5,850
पेड़ चिन्हांकन के लिए टैपर को ₹30/पेड़

भुगतान माध्यम: DBT के ज़रिए जीविका समूह द्वारा

सतत् जीविकोपार्जन योजना

लाभान्वित परिवार: 42,809 (कुल चयनित: 45,994)
वितरित राशि: ₹163.83 करोड़
निबंधन विभाग (ई-निबंधन एवं राजस्व)

राजस्व संग्रहण

2023-24 लक्ष्य: ₹7,000 करोड़ → प्राप्त: ₹6,170.91 करोड़
2024-25 लक्ष्य: ₹7,500 करोड़ → प्राप्त: ₹7,648.88 करोड़ (102%)
दस्तावेज संख्या (2024-25): 17,51,510 (24% वृद्धि)

2025-26 लक्ष्य: ₹8,250 करोड़
ई-निबंधन सॉफ्टवेयर
लागू अवधि: 29.07.2024 – 16.12.2024

सुविधाएं:
ऑनलाइन आवेदन
e-KYC
भूमि की जानकारी

एक बार कार्यालय आना
Footfall में कमी
पेपरलेस प्रक्रिया
प्रायोगिक तौर पर 4 कार्यालयों में लागू
दस्तावेजों की डिजिटल प्रति दी जाएगी

डिजिटाइजेशन

1995-2025: 2.34 करोड़ दस्तावेज डिजिटाइज्ड
1908-1990 तक के 5.0 करोड़ दस्तावेजों का काम जारी

सुविधाएं

“May I Help You” काउंटर
वातानुकूलित प्रतीक्षालय
स्वच्छ जल, शौचालय, Canteen (जीविका द्वारा संचालित)
नये निबंधन कार्यालय (2025)
वीरपुर (सुपौल), सोनवर्षा (सहरसा), पालीगंज (पटना)

कुल कार्यालय: 140
जिला: 38
अवर: 102

ई-स्टाम्प एवं कोर्ट फीस

Co-operative Bank के माध्यम से बिक्री

Franking मशीन से ₹1000 तक के स्टाम्प

E-Court फीस ACC Counter और Franking दोनों से

रिक्त पदों की भरती

कुल रिक्त पद: 549

अवर/संयुक्त अवर निबंधक: 14
लिपिक: 440
आशुलिपिक: 09
वाहन चालक: 07
परिचारी: 79

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