“केजरीवाल की सुरक्षा खर्च का हिसाब दे AAP सरकार: हरजीत सिंह गरेवाल”

केजरीवाल द्वारा अपनी सुरक्षा वापसी का आरोप बीजेपी पर लगाना बेबुनियाद: हरजीत सिंह गरेवाल
चंडीगढ़, 24 जनवरी ( ): भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व वरिष्ठ नेता हरजीत सिंह गरेवाल ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की पंजाब पुलिस की सुरक्षा वापिस लिए जाने का आरोप बीजेपी तथा केंद्र सरकार पर लगाए जाने के ब्यान पर बोलते हुए कहा कि केजरीवाल तथा आम आदमी पार्टी के सभी नेता शायद यह भूल गए हैं कि दिल्ली तथा पंजाब दोनों में आम आदमी पार्टी की सरकार है और केजरीवाल की सुरक्षा आम आदमी पार्टी पंजाब की भगवंत मान सरकार के डीजीपी के आदेश पर वापिस ली गई है, ना कि बीजेपी के किसी डीजीपी की आदेश पर। उन्होंने कहा कि केजरीवाल तथा उनके नेता अपने कुकृत्य छुपाने तथा जनता को मुर्ख बनाने के लिए बीजेपी पर आरोप लगाते हैं।
गरेवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा मुख्यमंत्री भगवंत मान चुनाव से पहले कहते थे कि वह कोई सुरक्षा नहीं लेंगें, जबकि जीतने के बाद अरविंद केजरीवाल को Z सुरक्षा मिली हुई थी। इसके साथ ही अरविंद केजरीवाल को पंजाब सरकार ने भी पंजाब पुलिस की सुरक्षा मुहैया कराई थी। लेकिन, अब अरविंद केजरीवाल से पंजाब पुलिस की सुरक्षा हटा ली गई है। दरअसल, ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि,अरविंद केजरीवाल के पास पहले से ही दिल्ली पुलिस की Z प्लस श्रेणी की सुरक्षा मौजूद है।
हरजीत सिंह गरेवाल ने कहा कि अगर Z प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिले हुए प्रोटेक्टी को कोई अन्य राज्य सरकार सुरक्षा मुहैया कराती है तो उस राज्य की पुलिस की सुरक्षा में 72 घंटे तक ही प्रोटेक्टी के पास रहती है और 72 घंटे बाद वह स्वयं वापस हो जाती है, ऐसा MHA का नियम है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति अगर बाहरी राज्य की पुलिस की सुरक्षा अपने लिए लेता है तो उसके एवज में उसे इसका भुगतान करना पड़ता है। जबकि केजरीवाल की सुरक्षा में लगे पंजाब पुलिस के जवानों के भुगतान का हिसाब आम आदमी पार्टी की दिल्ली की सरकार तथा आम आदमी पार्टी पंजाब की भगवंत मान सरकार ने कभी भी जनतक नहीं किया।
गरेवाल ने कहा कि पंजाब पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान साफ शब्दों में कहा है कि दिल्ली पुलिस और निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए उन्होंने केजरीवाल की सुरक्षा से पंजाब पुलिस के जवानों को हटाया है। इस तरह का बदलाव पांच फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हुआ था।
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