Uncategorized

भारत की ‘स्पैम ढाल’: 2025 में ट्रूकॉलर ने रोकीं 1,200 करोड़ अनचाही कॉल्स

आंतरिक रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर ठगी के प्रयासों का खुलासा, उपभोक्ताओं का समय और पैसा बचा

लखनऊ, 11 फरवरी 2026।
ट्रूकॉलर की 2025 इंडिया इनसाइट्स रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान भारत में 4,168 करोड़ से अधिक स्पैम कॉल की पहचान की गई। इनमें से 1,189 करोड़ अनचाही कॉल उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक कर दी गईं, जिससे लाखों लोगों को संभावित ठगी, मानसिक तनाव और समय की बर्बादी से राहत मिली।

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 770 करोड़ से अधिक फर्जी कॉल बैंक, सरकारी विभागों और प्रसिद्ध ब्रांड्स की नकल कर किए गए। इस प्रकार के कॉल उपभोक्ताओं को भ्रमित कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किए जाते हैं।

स्पैम संदेशों की समस्या भी गंभीर बनी रही। वर्ष 2025 में 12,903 करोड़ से अधिक स्पैम एसएमएस की पहचान की गई, जिनकी संख्या वर्ष की दूसरी छमाही में तेजी से बढ़ी। जब असली और फर्जी संदेश एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद होते हैं, तो उपयोगकर्ताओं के लिए सही और गलत की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

ट्रूकॉलर के सीईओ रिशित झुनझुनवाला ने कहा कि आज के डिजिटल युग में भरोसा भारत की सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय समस्या भी है, जो लोगों के डर और जल्दबाज़ी का फायदा उठाती है। ट्रूकॉलर का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें जुड़े रहने में सहायता प्रदान करना है।

रिपोर्ट के अनुसार, औसतन एक स्पैम कॉल की अवधि 1.8 मिनट होती है। इस आधार पर अनुमान है कि ट्रूकॉलर की सहायता से भारतीय उपयोगकर्ताओं ने प्रतिदिन लगभग 21.7 लाख घंटे और प्रति सप्ताह 1.5 करोड़ घंटे से अधिक समय की बचत की। यह समय बचत न केवल सुविधा प्रदान करती है, बल्कि संभावित आर्थिक नुकसान से भी बचाती है।

रिपोर्ट में भविष्य को लेकर चेतावनी भी दी गई है। एआई आधारित वॉइस स्कैम, पहचान सत्यापन के नाम पर ठगी और बहु-स्तरीय धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि की आशंका जताई गई है। ट्रूकॉलर ने उपयोगकर्ताओं से सतर्क रहने, किसी भी अज्ञात कॉल या संदेश पर संवेदनशील जानकारी साझा न करने और भरोसेमंद पहचान तकनीक का उपयोग करने की अपील की है।

Related Articles

Back to top button