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कोटक अल्ट्स ने लॉन्च किए ‘कैटलिस्ट अवॉर्ड्स

भारत के टॉप फाइनेंशियल वोडकास्ट को मिलेगा ₹25 लाख का इनाम


कोटक अल्टरनेट एसेट मैनेजर्स लिमिटेड (कोटक अल्ट्स) ने भारत में फाइनेंशियल कंटेंट क्रिएटर्स को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘कोटक अल्ट्स कैटलिस्ट अवॉर्ड्स’ की शुरुआत की है। यह अपनी तरह का पहला मंच है, जिसके तहत देश के सर्वश्रेष्ठ फाइनेंशियल वोडकास्ट (वीडियो पॉडकास्ट) को ₹25 लाख का विनर-टेक्स-ऑल पुरस्कार दिया जाएगा।

इस अवॉर्ड का उद्देश्य भरोसेमंद, गुणवत्तापूर्ण और जिम्मेदार वित्तीय जानकारी को बढ़ावा देना है, ताकि युवा और पहली बार निवेश करने वाले लोग सही फैसले ले सकें। कैटलिस्ट अवॉर्ड ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित करेगा, जो जटिल फाइनेंशियल विषयों को सरल भाषा में समझाकर निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं।

इच्छुक प्रतिभागी वर्ष 2025 (1 जनवरी से 31 दिसंबर, 2025) के बीच यूट्यूब पर जारी अपने सर्वश्रेष्ठ वोडकास्ट को 31 जनवरी, 2026 तक
katalyst.kotakalternateasset.com पर सबमिट कर सकते हैं। इसके बाद इंडस्ट्री के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की जूरी कंटेंट की गुणवत्ता, नयापन और दर्शकों की भागीदारी के आधार पर मूल्यांकन करेगी।

कोटक अल्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीनि श्रीनिवासन ने कहा कि भारत इस समय फाइनेंशियल भागीदारी की बड़ी लहर से गुजर रहा है। इंटरनेट पर जानकारी की भरमार है, लेकिन सही और गलत सलाह में फर्क कर पाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में पॉडकास्ट और वोडकास्ट एक सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। कैटलिस्ट अवॉर्ड उन क्रिएटर्स को सामने लाएगा, जो भरोसे के साथ सही निवेश शिक्षा को रोचक और उपयोगी बनाते हैं।

योग्यता और आवेदन की प्रमुख शर्तें
आवेदक भारतीय नागरिक हो और भारत में निवास करता हो।
31 दिसंबर, 2025 तक यूट्यूब चैनल पर कम से कम 50,000 सब्सक्राइबर हों।
फाइनेंस कंटेंट में न्यूनतम 1 वर्ष का अनुभव और कम से कम 3 एडवाइजरी एपिसोड होना अनिवार्य है।
कम से कम 5 मिनट का एक वोडकास्ट सबमिट करना होगा, जो 2025 में जारी हुआ हो।
कंटेंट अंग्रेजी या प्रमुख भारतीय भाषाओं में हो सकता है, लेकिन अंग्रेजी सबटाइटल्स जरूरी हैं।

कैटलिस्ट अवॉर्ड उन कंटेंट क्रिएटर्स को पहचान देता है, जो मुनाफे से पहले भारत की वित्तीय साक्षरता को प्राथमिकता देते हैं। यह पहल न केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसेमंद निवेश शिक्षा को बढ़ावा देती है, बल्कि देशभर में समझदारी से निवेश करने की संस्कृति को भी मजबूत करती है।

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