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Viral Video हाथी के नेशनल हाइवे के बैरिकेड को तोड़ बहस

Viral Video हाथी के नेशनल हाइवे के बैरिकेड को तोड़ बहस

कहा जाता है कि हाथी की याददाश्त काफी तेज होती है, उनकी स्मृतियों से सूचनाएं जल्दी मिटती नहीं हैं। हाथी एक बार जिन रास्तों से गुजरते हैं, वे हमेशा

उसे याद रखते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक हाथी के नेशनल हाइवे के बैरिकेड को तोड़कर अपने परिवार के लिए रास्ता बनाने का वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो को साझा किए जाने के बाद से सोशल मीडिया पर वन्य जीवों के प्राकृतिक वास स्थानों से छेड़छाड़ करने पर बहस शुरू हो गई है।

आइएफएस अधिकारी प्रवीण कासवान ने 03 दिसंबर को हाथियों के सड़क पार करने का यह वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया। इस वीडियो में दिख

रहा है कि एक मादा हाथी अपने परिवार के 5 अन्य सदस्यों को सड़क पार करने के लिए नेशनल हाइवे पर लगे बैरिकेड को तोड़कर रास्ता बनाती है, जिसके बाद एक-एक करके सभी हाथी सड़क पार करते हैं।

यह घटना कोयम्बटूर मेट्टूपलयाम नेशनल हाइवे की है। हा​थियों के सड़क पार करने के दौरान दोनों ओर से वाहन रुक गए थे। वहां मौजूद एक शख्स इस घटना का वीडियो बना रहा है।

आइएफएस अधिकारी कासवान ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है कि नेतृत्व जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। उन्होंने बताया है कि हाथी कभी भी अपने रास्तों को नहीं भू

कल शेयर किए गए इस वीडियो को अब तक 17,600 से अधिक बार देखा जा चुका है। इस वीडियो को 1500 से अधिक लोगों ने लाइक किया है और 424 बार रिट्वीट किया गया है। इस वीडियो के शेयर करने के बाद से वन्य जीवों के अधिकारों पर बहस छिड़ गई है।

कुछ यूजर्स का कहना है कि हाथियों को सड़क पार करने के लिए एक छोटा सा पुल या क्रॉसिंग गेट बनाना चाहिए, ताकि वे आसानी से सड़क पार कर सकें।

विजय कुमार ने लिखा है कि यह रास्ता नहीं बना रही है, बल्कि इंसानों के अतिक्रमण को हटा रही है। हम इंसानों ने अन्य प्रजातियों के साथ जो बर्ताव किया है, उसके लिए हमें पछतावा होना चाहिए और हमें जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

नकुल खालिदकर ने ट्वीट किया है कि यह एक स्पष्ट उदाहरण है कि मनुष्य इन जीवों के वास स्थानों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं।

नन्दू ने लिखा है कि क्या अथॉरिटीज हाइवे के नीचे या ऊपर इन हाथियों को सड़क पार करने के लिए क्रॉसिंग नहीं बना सकते हैं? उन्होंने प्रवीण कासवान से अनुरोध किया है कि क्या आप इस समस्या को संबंधित वन विभाग के अधिकारियों के समक्ष उठा सकते हैं।

 

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