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	<title>lifestyle Archives - Ad Event Media</title>
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	<title>lifestyle Archives - Ad Event Media</title>
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	<item>
		<title>“भारतीय खज़ाना 63वां ग्रैंड एडिशन: लखनऊ में फैशन-लाइफस्टाइल और ज्वेलरी प्रदर्शनी”</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AdEvent Media]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 10:28:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊ / 19-20 नवंबर, 2025 — होटल क्लार्क्स अवध में आयोजित होने जा रही “इंडियन ट्रेज़र” की 63वीं ग्रैंड एडिशन में फैशन और लाइफस्टाइल प्रेमियों का भरपूर आनंद लेने का अवसर मिलेगा। यह दो दिवसीय प्रदर्शनी सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलेगी, और इसमें प्रवेश नि:शुल्क है। इस आयोजन में ठंडी ऋतु</p>
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<p><strong>लखनऊ / 19-20 नवंबर, 2025</strong> — होटल क्लार्क्स अवध में आयोजित होने जा रही <em>“इंडियन ट्रेज़र”</em> की 63वीं ग्रैंड एडिशन में फैशन और लाइफस्टाइल प्रेमियों का भरपूर आनंद लेने का अवसर मिलेगा। यह दो दिवसीय प्रदर्शनी सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलेगी, और इसमें प्रवेश नि:शुल्क है।</p>



<p>इस आयोजन में ठंडी ऋतु के नवीनतम कलेक्शन, प्रीमियम ज्वेलरी, डेकोर, एक्सेसरीज़, बैग, फुटवियर, हस्तशिल्प, सेरामिक किचनवेयर और अन्य जीवनशैली उत्पादों की धारा देखने को मिलेगी।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="967" height="1024" src="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2025/11/0x0-967x1024.png" alt="" class="wp-image-110087" srcset="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2025/11/0x0-967x1024.png 967w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2025/11/0x0-283x300.png 283w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2025/11/0x0-142x150.png 142w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2025/11/0x0-768x814.png 768w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2025/11/0x0.png 1061w" sizes="(max-width: 967px) 100vw, 967px" /></figure>



<p>प्रदर्शनी के आयोजक <strong>मिर्ज़ा तौनीर</strong> ने बताया कि यह लखनऊ की सबसे विश्वसनीय और लोकप्रिय फैशन-शो में से एक है। अधिक जानकारी या स्टाल बुकिंग के लिए निम्न नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है: <strong>9335230886</strong>, <strong>9044099060</strong>।</p>



<p>सभी फैशन-शौकीनों और खरीद-प्रेमियों के लिए यह एक शानदार मंच है जहाँ वे नवीनतम और सबसे खूबसूरत रुझानों का अनुभव कर सकते हैं।</p>
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		<title>Summer Health Tips: गर्मी में बच्चों का रखें खास ख्याल, हो सकते हैं बीमार</title>
		<link>https://adeventmedia.com/summer-health-tips-take-special-care-of-children-in-summer-they-may-fall-ill/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[AdEvent Media]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Apr 2024 11:13:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Beauty]]></category>
		<category><![CDATA[Life Style]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लखनऊः राजधानी लखनऊ समेत पूरे सूबे में गर्मी के मौसम ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। खास कर दोपहर को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बरतने पर बड़े हों या बच्चे, किसी को भी बीमार कर सकती है। खासकर बच्चे गर्मी के मौसम में जल्दी</p>
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<p><strong>लखनऊः</strong> राजधानी लखनऊ समेत पूरे सूबे में गर्मी के मौसम ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। खास कर दोपहर को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे मौसम में जरा सी लापरवाही बरतने पर बड़े हों या बच्चे, किसी को भी बीमार कर सकती है। खासकर बच्चे गर्मी के मौसम में जल्दी शिकार होते हैं इसलिए उनका इस मौसम में ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में बच्चों को गर्मी के मौसम में बीमारी से बचाने के उपायों के बारे में इंडिया पब्लिक खबर के संवाददाता पवन सिंह चैहान ने केजीएमयू व पीजीआई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका और डॉ. पियाली भट्टाचार्या से विशेष बातचीत की।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>बच्चों को ठंडा पानी पीने की जिद करती है बीमार&nbsp;</strong></h2>



<p>केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका ने बताया कि तपती धूप और पसीने से भीगा हुआ बच्चा जब स्कूल से घर पहुंचता है, तो घर पर आते ही फ्रिज की ओर भागता है। ठंडा पानी पीने की जिद उसे बीमार कर सकती है। ऐसे ही बच्चा शाम को खेलते समय ठंडे पानी पी ले, तो उसके बीमार पड़ने का खतरा ज्यादा होता है। गर्मी में बच्चों को हाइड्रेट रखना चाहिए व बासी खाना देने से बचना चाहिए। इसके साथ ही कोई भी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।</p>



<p> गर्मी के मौसम में बच्चों में अक्सर डायरिया के साथ ही जितने भी बैक्टीरियल इंफेक्शन वाली बीमारियां हैं, देखने को मिलती है। गर्मी से बचाव के साथ ही अगर साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाएगा तो बच्चा जल्दी डायरिया या स्किन की समस्या से बीमार हो सकता है। बाहर के खाने से बचना चाहिए क्योंकि बाहर का खाना या होटल का खाना कब का बना हुआ है और कितनी बार गर्म किया जा चुका है, इसके बारे में कुछ मालूम नहीं होता। ऐसे खाने का सेवन बच्चों के साथ बड़ों को भी बीमार बना सकता है। डॉ. सारिका के अनुसार ऐसे मौसम में बच्चों को मौसमी फल खाने के लिए अवश्य देना चाहिए। </p>



<h3 class="wp-block-heading">गर्मी के मौसम में इन चीजों का करें इस्तेमाल</h3>



<p>जैसे- तरबूज, खरबूज, आम का पना, सत्तू जैसी हल्की चीजों का सेवन करना गर्मी के मौसम से अच्छा रहता है। पीजीआई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने बताया कि गर्मी के मौसम में बच्चों को खासतौर पर बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से पेट की समस्या ज्यादा हो सकती है। जिससे डिहाइड्रेशन, डायरिया और कमजोरी जैसी समस्या उन्हें घेर सकती है। इस मौसम में बच्चों के स्कूलों की छुट्टी होती है। जिससे वह दोपहर को खेलने के लिए घर से बाहर जाते हैं और पसीने से लथपथ होने के बाद ठंडा पानी पी लेते हैं, जिससे उनके गले खराब हो जाते हैं।&nbsp;</p>



<p>सर्दी-गर्मी की वजह से बुखार उनको जकड़ लेता है। बाहर से आते ही नहीं, बल्कि शरीर का तापमान सामान्य होने के बाद पानी पीने के लिए देना चाहिए। अधिकतर अभिभावक बच्चों को लेकर शाम को बाजार घूमने निकलते हैं तो बाहर बिकने वाले ठंडे पेय पदार्थ और खाने की चीजे बच्चों को दिलाते हैं, जो बच्चों की सेहत बिगाड़ सकते हैं। ऐसे में बच्चे को दस्त लगना, ज्वाइंडिस, वायरल और डायरिया जैसी बीमारियों ग्रसित होने के खतरे बढ़ जाते हैं। डॉ. पियाली के मुताबिक, मौसम में बदलाव से वैसे तो सभी परेशान होते हैं, लेकिन बच्चों में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है।&nbsp;&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading">बचाव के उपाय</h3>



<p>&#8211; बाहर से पसीने में लथपथ लौटकर घर आते ही बच्चों को तुरंत कुछ भी ठंडा खाने या पीने के लिए देने से बचना चाहिए।</p>



<p>&#8211; बाहर बाजार से वस्तुएं मंगाकर या होटल रेस्त्रां में खाने से बचना चाहिए।</p>



<p>&#8211; गर्मी के दिनों में आने वाले फलों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।</p>



<p>&#8211; ज्यादा देर तक एसी में बैठे रहने के बाद एकदम से बाहर गर्मी में जाने से बचना चाहिए।</p>



<p>&#8211; पेय पदार्थ जैसे- नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ आदि का समय-समय पर सेवन करते रहना बेहतर उपाय है।</p>



<p>&#8211; तेज धूप में बच्चों को बाहर खेलने से रोकना चाहिए।</p>



<p>&#8211; कोई समस्या होने पर खुद कोई इलाज न करें और न ही कोई दवा खासतौर पर एंटीबायोटिक न दें।</p>



<p>&#8211; बच्चों में दस्त, बुखार, स्किन इंफेक्शन दिखाई दे, तो डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज करें।</p>
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		<title>क्या है Hemophilia जो बन सकता है ब्लीडिंग का कारण, एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के तरीके</title>
		<link>https://adeventmedia.com/what-is-hemophilia-that-can-cause-bleeding-know-its-symptoms-causes-and-prevention-methods-from-experts/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[AdEvent Media]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Apr 2024 07:01:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Beauty]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Hemophilia रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग से जुड़ा एक विकार है जिसकी वजह से शरीर में खून जमने की प्रक्रिया रुक जाती है। यह एक गंभीर समस्या है लेकिम बावजूद इसके आज भी लोगों में इसे लेकर जागरूकता की कमी है। ऐसे में इस विकार के लक्षण कारण और प्रकार बारे में विस्तार से जानने के लिए</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>Hemophilia रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग से जुड़ा एक विकार है जिसकी वजह से शरीर में खून जमने की प्रक्रिया रुक जाती है। यह एक गंभीर समस्या है लेकिम बावजूद इसके आज भी लोगों में इसे लेकर जागरूकता की कमी है। ऐसे में इस विकार के लक्षण कारण और प्रकार बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने एक्सपर्ट से बात की।</p>



<p>आमतौर पर चोट लगने, कटने आदि पर खून में मौजूद एक विशेष तरह का प्रोटीन (Protein) सक्रिय हो जाता है। इससे खून में थक्के जमने की प्रक्रिया शुरू होती है और थोड़ी देर बाद खून बहना बंद हो जाता है, लेकिन जब शरीर खून जमने की प्रक्रिया नहीं हो पाती, वह इस स्थिति को हीमोफीलिया (Hemophilia) कहा जाता है। वास्तव में हीमोफीलिया रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग से संबंधित एक आनुवंशिक विकार है। इस बारे में विस्तार से जानने के लिए सीमा झा ने नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर हीमोटोलाजिस्ट डॉ. गौरव खार्या से बातचीत की।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या है हीमोफीलिया?</h2>



<p>डॉक्टर गौरव बताते हैं कि हीमोफीलिया शरीर में खून के थक्के जमने की प्रक्रिया को बंद कर देता है। इस विकार का वाहक एक्स क्रोमोजोम होने के कारण महिलाओं से पुरुषों में इसका प्रवाह पाया जाता है। निदान की बात करें तो अभी इस संबंध में उस स्तर की जागरूकता नहीं आई है कि लोग हीमोफीलिया का पारिवारिक इतिहास रहने पर कंसेप्शन से पहले सजग रह सकें। हालांकि, जीन चिकित्सा की मदद से काफी हद तक इस बीमारी को रोकने में मदद मिल सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">हीमोफीलिया के प्रकार</h2>



<p>हीमोफिलिया ए और बी सबसे सामान्य प्रकार हैं। अगर मरीज इन दोनों प्रकार के हीमोफीलिया से पीड़ित है,तो उसे लंबे समय तक ब्लीडिंग का सामना करना पड़ता है। अगर हीमोफीलिया है, तो सबसे ज्यादा ध्यान ब्लीडिंग से बचने और इसके इलाज पर ध्यान होना चाहिए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या हैं लक्षण</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>शरीर पर कई बड़े या गहरे घाव।</li>



<li>जोड़ों में दर्द, जकड़न या सूजन होना</li>



<li>बिना किसी कारण के नाक से खून बहना</li>



<li>हीमोफीलिया से पीड़ित बच्चे में कई टार्गेट प्वाइंट बन जाते हैं। जैसे-कभी कंधे पर तो कभी घुटने पर गांठ बन जाती है।</li>



<li>बच्चे को असहनीय दर्द हो सकता है। उसे बार-बार उल्टी होती है।</li>



<li>लंबे समय तक तेज सिरदर्द रहना</li>



<li>अत्यधिक थकान महसूस होना</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">इन बातों का रखें ध्यान</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>अब ऐसे मरीजों की प्रोफाइल तैयार की जाती है। इससे पता चल जाता है कि किस स्तर का हीमोफीलिया है।</li>



<li>साप्ताहिक दवा भी मिलने लगी है, जिससे अब हीमोफीलिया का बेहतर प्रबंधन संभव है।</li>



<li>अगर घर में इस बीमारी का इतिहास है, तो पति-पत्नी को बच्चे के जन्म से पहले ही अपनी हीमोफीलिया जांच करानी चाहिए।</li>



<li>हीमोफीलिया के शिकार हैं, तो तनाव लेने के बजाय उपचार पर ध्यान केंद्रित करें।</li>



<li>हीमोफीलिया के मरीजों को बह चुके खून की पूर्ति करने के लिए अच्छे खानपान पर ध्यान देना चाहिए।</li>
</ul>
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		<item>
		<title>यातायात प्रदूषण से मस्तिष्क में अल्जाइमर प्लाक होने की संभावना !</title>
		<link>https://adeventmedia.com/traffic-pollution-may-cause-alzheimers-plaques-in-the-brain/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[AdEvent Media]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Mar 2024 09:49:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Beauty]]></category>
		<category><![CDATA[Life Style]]></category>
		<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[#healt]]></category>
		<category><![CDATA[adeventmedia]]></category>
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		<category><![CDATA[Traffic pollution may cause Alzheimer']]></category>
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					<description><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क । एक अध्ययन में सामने आया है कि जो लोग प्रदूषित वातावरण में अधिक समय व्यतीत करते हैं, उनके मस्तिष्क में अल्जाइमर रोग से संबंधित अमाइलॉइड प्लाक की उच्च मात्रा होने की संभावना अधिक होती है। न्यूरोलॉजी के ऑनलाइन अंक में प्रकाशित अध्ययन यह साबित नहीं करता है कि वायु प्रदूषण मस्तिष्क में अधिक</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>न्यूयॉर्क । एक अध्ययन में सामने आया है कि जो लोग प्रदूषित वातावरण में अधिक समय व्यतीत करते हैं, उनके मस्तिष्क में अल्जाइमर रोग से संबंधित अमाइलॉइड प्लाक की उच्च मात्रा होने की संभावना अधिक होती है।</p>



<p>न्यूरोलॉजी के ऑनलाइन अंक में प्रकाशित अध्ययन यह साबित नहीं करता है कि वायु प्रदूषण मस्तिष्क में अधिक अमाइलॉइड प्लाक (हानिकारक परत) का कारण बनता है। यह केवल एक जुड़ाव दर्शाता है।</p>



<p>अमेरिका के जॉर्जिया में एमोरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 224 लोगों के मस्तिष्क के ऊतकों की जांच की, जो मनोभ्रंश पर शोध को आगे बढ़ाने के लिए मृत्यु के बाद अपने मस्तिष्क दान करने के लिए सहमत हुए। लोगों की मृत्यु औसतन 76 वर्ष की आयु में हुई थी।</p>



<p>इसके बाद शोधकर्ताओं ने प्रदूषण के जोखिम की तुलना मस्तिष्क में अल्जाइमर रोग के लक्षणों के माप से की।</p>



<p>उन्होंने मृत्यु के समय अटलांटा क्षेत्र में लोगों के घर के पते के आधार पर यातायात से संबंधित वायु प्रदूषण जोखिम को देखा।</p>



<p>मृत्यु से पहले वर्ष में एक्सपोज़र का औसत स्तर 1.32 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और मृत्यु से पहले के तीन वर्षों में 1.35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।</p>



<p>उन्होंने पाया कि मृत्यु से एक और तीन साल पहले वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों के मस्तिष्क में अमाइलॉइड प्लाक का स्तर अधिक होने की संभावना ज्यादा थी।</p>



<p>मृत्यु से पहले के वर्ष में 1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर अधिक पीएम 2.5 एक्सपोज़र वाले लोगों में प्लाक के उच्च स्तर होने की संभावना लगभग दोगुनी थी, जबकि मृत्यु से पहले तीन वर्षों में उच्च एक्सपोज़र वाले लोगों में प्लाक के उच्च स्तर होने की संभावना 87 प्रतिशत अधिक थी।</p>



<p>एमोरी यूनिवर्सिटी के अंके ह्यूल्स ने कहा, &#8220;ये नतीजे इस सबूत को जोड़ते हैं कि यातायात से संबंधित वायु प्रदूषण से उत्पन्न सूक्ष्म कण मस्तिष्क में अमाइलॉइड प्लाक की मात्रा को प्रभावित करते हैं।&#8221;</p>



<p>&#8220;इस लिंक के पीछे के तंत्र की जांच के लिए और अधिक शोध की जरुरत है।&#8221;</p>



<p>इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि क्या अल्जाइमर रोग से जुड़े मुख्य जीन संस्करण, एपीओई ई4 का वायु प्रदूषण और मस्तिष्क में अल्जाइमर के संकेतों के बीच संबंध पर कोई प्रभाव पड़ता है।</p>



<p>उन्होंने पाया कि वायु प्रदूषण और अल्जाइमर के लक्षणों के बीच सबसे मजबूत संबंध जीन संस्करण के बिना अल्जाइमर के लक्षणों में था।</p>



<p>ह्यूल्स ने कहा, &#8220;इससे पता चलता है कि वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय कारक उन रोगियों में अल्जाइमर के लिए एक योगदान कारक हो सकते हैं, जिनमें बीमारी को आनुवंशिकी द्वारा समझाया नहीं जा सकता है।&#8221;</p>
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		<item>
		<title>हार्ट का कोरोनरी स्टेंट कितने साल चलता है ?, यहां पढ़ें</title>
		<link>https://adeventmedia.com/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%9f-%e0%a4%95/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[AdEvent Media]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Dec 2023 09:07:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health & Beauty]]></category>
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		<category><![CDATA[heart coronary stent]]></category>
		<category><![CDATA[how many years does it last]]></category>
		<category><![CDATA[lifestyle]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कोरोनरी स्टेंट एक तकनीकी उपाय है जिसका उपयोग धमनियों (कोरोनरी आर्टरीज) को खोलने के लिए किया जाता है ताकि रक्त स्वतंत्रता से हृदय में पहुंच सके। इसका उपयोग हृदय संबंधित समस्याओं, जैसे कि दिल का दौरा, कोरोनरी आर्टरी रोग, या अन्य धमनीक बीमारियों के इलाज में किया जाता है। कोरोनरी स्टेंट जिस तकनीकी साधन का</p>
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<p style="font-size:22px">कोरोनरी स्टेंट एक तकनीकी उपाय है जिसका उपयोग धमनियों (कोरोनरी आर्टरीज) को खोलने के लिए किया जाता है ताकि रक्त स्वतंत्रता से हृदय में पहुंच सके। इसका उपयोग हृदय संबंधित समस्याओं, जैसे कि दिल का दौरा, कोरोनरी आर्टरी रोग, या अन्य धमनीक बीमारियों के इलाज में किया जाता है।</p>



<p style="font-size:22px">कोरोनरी स्टेंट जिस तकनीकी साधन का उपयोग किया जाता है, वह साधन धातु से बना होता है और धातु की दरबारी विशेषता और रक्त की प्रवाह की गति के आधार पर इसकी जीवनकाल की अधिकतम विशेषता को निर्धारित करती है।</p>



<p style="font-size:22px">कई प्रकार के स्टेंट्स उपलब्ध हैं, जिनमें शास्त्रीय (बेयर-मेटलिक) और ड्रग-एलूटिंग स्टेंट्स शामिल हैं। शास्त्रीय स्टेंट्स का जीवनकाल आमतौर पर कुछ साल से लेकर कई दशक तक हो सकता है, जबकि ड्रग-एलूटिंग स्टेंट्स में शास्त्रीय स्टेंट्स के मुकाबले ड्रगों का उपयोग किया जाता है जो आराम से विघटित होते हैं और उनका प्रभाव अधिक समय तक बना रहता है।</p>



<p style="font-size:22px">यह निर्भर करता है कि रोगी का स्वास्थ्य, सामान्य शारीरिक स्थिति, और स्थानांतरण का उपयोग किस तकनीकी साधन पर किया गया है। आपके चिकित्सक से यह सवाल करना हमेशा उचित होता है।</p>
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