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	<title>श्रद्धांजलि Archives - Ad Event Media</title>
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	<title>श्रद्धांजलि Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोवियत संघ के पूर्व  राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को दी श्रद्धांजलि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[AEM 'Web_Wing']]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Sep 2022 04:45:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Jyotish]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धांजलि]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>1985 में गोर्बाचेव कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति बने थे। उस समय सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था बहुत बुरे दौर से गुजर रही थी। उन्होंने आर्थिक सुधार शुरू किए। उनकी नीतियां सुधार के लिए थीं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोवियत संघ के पूर्व &#160;राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को बृहस्पतिवार को श्रद्धांजलि दी। पुतिन हालांकि</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%81-3/">राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोवियत संघ के पूर्व  राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को दी श्रद्धांजलि</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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<p>1985 में गोर्बाचेव कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति बने थे। उस समय सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था बहुत बुरे दौर से गुजर रही थी। उन्होंने आर्थिक सुधार शुरू किए। उनकी नीतियां सुधार के लिए थीं।</p>



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<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोवियत संघ के पूर्व &nbsp;राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव को बृहस्पतिवार को श्रद्धांजलि दी। पुतिन हालांकि पूर्व सोवियत नेता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। यह फैसला गोर्बाचेव की विरासत को लेकर क्रेमलिन की मिली-जुली भावना को प्रदर्शित करता है। &nbsp;बता दें कि गोर्बाचेव की पश्चिम में इस बात को लेकर तारीफ होती है कि उन्होंने बिना खून बहाए शीत युद्ध खत्म कर दिया था। वहीं सोवियत संघ के विघटने के लिए भी उन्हें जिम्मेदार माना जाता है। माना जाता है कि गोर्बाचेव की नीयत सही थी। वह सुधार करना चाहते थे लेकिन इसी वजह से उनकी सत्ता भी चली गई और सोवियत संघ 15 हिस्सों में टूट गया।&nbsp;<br>&nbsp;&nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;<br>गौरतलब है कि गोर्बाचेव का मंगलवार को निधन हो गया था। वह 91 वर्ष के थे। &nbsp;क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने बताया कि रूस के पश्चिमी छोर में बाल्टिक बस्ती कलिनिनग्राद के दौरे के लिए रवाना होने से पहले पुतिन मॉस्को के उस अस्पताल गए, जहां शनिवार को अंतिम संस्कार के पहले गोर्बाचेव की पार्थिव देह को पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए रखा गया है।</p>



<p><strong>क्यों हुआ सोवियत संघ का विघटन</strong></p>



<p>1985 में गोर्बाचेव कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति बने थे। उस समय सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था बहुत बुरे दौर से गुजर रही थी। उन्होंने आर्थिक सुधार शुरू किए। उनकी नीतियां सुधार के लिए थीं लेकिन परिणाम उल्टा निकले। जनता में असंतोष की वजह से यहां सत्ता का विरोध होने लगा। इसके बाद हालात ये बने कि गोर्बाचेव को विद्रोही प्रांतों को स्वतंत्र घोषित करना पड़ गया।&nbsp;</p>



<p>&nbsp;पेस्कोव ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल में संवाददाताओं से कहा, &#8221;यह खेदजनक है कि राष्ट्रपति के तय कार्यक्रम के कारण वह शनिवार को यह नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्होंने आज यह करने का फैसला किया।&#8221; रूसी सरकारी टेलीविजन चैनल में दिखाया गया कि पुतिन गोर्बाचेव के खुले ताबूत की ओर गए और उन्होंने उसके पास लाल गुलाब का एक गुलदस्ता रखा। वह कुछ देर मौन खड़े रहे, उन्होंने अपना सिर झुकाया, ताबूत को छुआ, अपने सीने पर हाथ रखा और फिर वहां से चले गए।<br>&nbsp;&nbsp; &nbsp;<br>&nbsp;गोर्बाचेव का मंगलवार को निधन हो गया था। उनकी पार्थिव देह को मास्को के नोवोडदेविची कब्रिस्तान में उनकी पत्नी रायसा के ताबूत के पास दफनाया जाएगा। इसके पहले &#8216;हाउस ऑफ द यूनियंस&#8217; के पिलर हॉल में उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी। &nbsp;पुतिन का अस्पताल में जाकर गोर्बाचेव को निजी रूप से श्रद्धांजलि देना और शनिवार को सार्वजनिक रूप से दी जानी वाली अंतिम श्रद्धांजलि से दूरी बनाना तथा अंतिम संस्कार के तरीके को लेकर अनिश्चितता पूर्व सोवियत नेता की विरासत को लेकर क्रेमलिन की असहजता को दर्शाती है। दिवंगत नेता को शीत युद्ध को समाप्त करने के लिए पश्चिम में सराहा जाता है, लेकिन 1991 में सोवियत के विघटन के लिए जिम्मेदार कदमों के लिए रूस में उनके कई आलोचक हैं।<br>&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;<br>यदि क्रेमलिन गोर्बाचेव के लिए राजकीय अंतिम संस्कार की घोषणा करता, तो पुतिन का आधिकारिक समारोह में शामिल न होना अजीब लगता। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने पर क्रेमलिन को विदेशी नेताओं को भी इसमें शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजना पड़ता, जो मास्को यूक्रेन में अपनी कार्रवाई को लेकर पश्चिम के साथ तनाव के बीच संभवत: नहीं करना चाहता।<br>&nbsp;&nbsp; &nbsp;&nbsp;<br>पुतिन ने गोर्बाचेव की स्पष्ट व्यक्तिगत आलोचना करने से बचते हुए अतीत में उन पर बार-बार आरोप लगाया था कि वह उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के पूर्व की ओर विस्तार की संभावनाओं को मिटाने के लिए पश्चिम से लिखित प्रतिबद्धताएं हासिल करने में नाकाम रहे। नाटो का पूर्व की ओर विस्तार पश्चिमी देशों और रूस के बीच संबंधों में तनाव का मुख्य कारण है और इसी के परिणामस्वरूप रूसी नेता ने 24 फरवरी को यूक्रेन में सेनाएं भेजीं।</p>
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		<title>उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी</title>
		<link>https://adeventmedia.com/uttarakhand-chief-minister-pushkar-singh-dhami-pays-tribute-to-the-martyred-state-agitators-in-mussoorie/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ranjeet Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Sep 2021 06:34:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[आंदोलनकारियों]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखण्ड]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी में शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के लिए मसूरी गोलीकांड में बेलमती चौहान, हंसा धनई, बलवीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, मदन मोहन ममगाईं, राय सिंह बंगारी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के राज्य आन्दोलनकारियों के बलिदान के कारण ही हमें उत्तराखण्ड नया राज्य मिला। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आन्दोनकारियों ने जिस उद्देश्य से अलग राज्य की मांग की थी। उसके अनुरूप ही राज्य को आगे बढ़ाया जायेगा। जन समस्याओं का समाधान तेजी से हो, इसके लिए हर स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा रहा है। जन सुविधा के लिए सरकार का ध्यान प्रक्रियाओं के सरलीकरण, समाधान और निस्तारण पर अधिकारियों को विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये गये हैं।<br>            मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जो राज्य आन्दोलनकारी चिन्हीकरण  हेतु छूट गये हैं, 31 दिसम्बर 2021 तक उन राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण की व्यवस्था की जायेगी। चिन्हित राज्य आन्दोलनकारी जिन्हें 3100 रुपये प्रतिमाह पेंशन अनुमन्य की गई है, उनकी मृत्यु के पश्चात उनके आश्रितों, पति/पत्नी को भी 3100 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जायेगी। विभिन्न विभागों में कार्यरत राज्य आन्दोलनकारियों को सेवा से हटाये जाने के माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर ठोस पैरवी करेगी। उद्योगों में नौकरी के लिए भी राज्य आन्दोलनकारियों को प्राथमिकता के लिए समुचित व्यवस्था की जायेगी। राजकीय अस्पतालों की तरह मेडिकल कॉलेजों में भी राज्य आंदोलनकारियों का निःशुल्क ईलाज किया जायेगा।<br>मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी के सिपनकोट के लोगों की पुनर्वास की उचित व्यवस्था की जायेगी। मसूरी रोपवे का कार्य शुरू होने से पूर्व सिपनकोट के लोगों के पुनर्वास की समस्या का समाधान किया जायेगा। मसूरी में वन टाइम  सेटलमेंट लागू किया जायेगा। गढ़वाल सभा के भवन को यदि अन्यत्र स्थान पर शिफ्ट करना पड़ा तो, इसके लिए दूसरी जगह पर व्यवस्था की जायेगी।<br>            केन्द्रीय पर्यटन एवं रक्षा राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट ने कहा कि शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के बलिदान की वजह से ही उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण हुआ है। उत्तराखण्ड अलग राज्य बना, यह प्रदेशवासियों के त्याग का ही परिणाम है। शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के सपनों के अनुरूप जो कार्य करना होगा, वह सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के पद्चिन्हों पर चलकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं।<br>          कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में मसूरी गोलीकांड एक महत्वपूर्ण घटना है। इसमें हमारे अनेक आन्दोलनकारी राज्य निर्माण की मांग को लेकर शहीद हुए। उन्होंने कहा कि सिपनकोट के लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था के लिए प्रयास हो रहे हैं, जल्द ही इसका समाधान निकाला जायेगा।<br>         इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री जोत सिंह गुनसोला, मसूरी नगर पालिका परिषद् के अध्यक्ष श्री अनुज गुप्ता, मसूरी नगर पालिका परिषद् के पूर्व अध्यक्ष श्री मन्नू मल, श्री बलजीत सिंह सोनी, एवं राज्य आन्दोलनकारी मौजूद थे।</p>
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		<title>उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Ranjeet Gupta]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Sep 2021 06:33:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[आंदोलनकारि]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखण्ड]]></category>
		<category><![CDATA[पुष्कर सिंह धामी]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धांजलि]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिजनों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिजनों को सम्मानित कर वे स्वयं को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं।  खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा आदि</p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/uttarakhand-chief-minister-pushkar-singh-dhami-pays-tribute-to-the-martyred-state-agitators-in-khatima/">उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p>मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित कर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिजनों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिजनों को सम्मानित कर वे स्वयं को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं।  खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा आदि जगहों पर हुई शहादत से ही उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण हुआ। शहीदों के सपनों के अनुरूप उत्तराखण्ड राज्य का विकास करने के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है। हमारे राज्य आंदोलनकारियों ने रोजगार, सड़क, शिक्षा आदि को लेकर जो सपने देखे, उन्हें पूरा करने के लिए हमारी सरकार लगातार प्रयासरत है। आने वाले 10 वर्षों में निश्चित रूप से उत्तराखण्ड को देश का आदर्श राज्य बनाएंगे।<br>     मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को सम्मान स्वरूप प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। परंतु अनेक राज्य आंदोलनकारी इससे छूट गए हैं। 30 जुलाई 2018 के बाद राज्य आंदोलनकारियें का चिन्हीकरण नहीं किया गया। राज्य आंदोलनकारियों की मांग पर राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हिकरण के लिए नया शासनादेश जारी किया जाएगा। इसमें 31 दिसम्बर 2021 तक चिन्हिकरण की व्यवस्था की जाएगी।<br>     मुख्यमंत्री ने कहा कि चिन्हित राज्य आंदोलनकारी जिन्हें 3100 रूपए पेंशन अनुमन्य की गई है, उनकी मृत्यु के पश्चात उनके आश्रितों, पत्नी/पति को भी 3100 रूपए प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी। विभिन्न विभागों में कार्यरत राज्य आंदोलनकारियों को सेवा से हटाए जाने के माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर ठोस पैरवी करेगी। उद्योगों में नौकरी  के लिए राज्य आंदोलनकारियों को प्राथमिकता के लिए समुचित व्यवस्था की जाएगी। राजकीय अस्पतालों की तरह ही मेडिकल कालेजों में भी राज्य आंदोलनकारियों का निशुल्क ईलाज सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की अन्य मांगों पर भी निश्चित रूप से विचार किया जाएगा।  </p>
<p>The post <a href="https://adeventmedia.com/uttarakhand-chief-minister-pushkar-singh-dhami-pays-tribute-to-the-martyred-state-agitators-in-khatima/">उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी</a> appeared first on <a href="https://adeventmedia.com">Ad Event Media</a>.</p>
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