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	<title>भगवान शिव Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>भगवान शिव के धनुष के नाम पर रखे गए राकेट लांचर पिनाक एक बार फ‍िर सुर्खियों में</title>
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		<pubDate>Sun, 21 Aug 2022 05:56:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>भगवान शिव के धनुष के नाम पर रखे गए राकेट लांचर पिनाक एक बार फ‍िर सुर्खियों में है। इसकी खूबियां ऐसी है क‍ि दुश्‍मन भी कांप उठेगा। सेना का यह लांचर 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर शिव के पिनाक से क्‍यों चिंतित हैं</p>
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<p>भगवान शिव के धनुष के नाम पर रखे गए राकेट लांचर पिनाक  एक बार फ&#x200d;िर सुर्खियों में है। इसकी खूबियां ऐसी है क&#x200d;ि दुश्&#x200d;मन भी कांप उठेगा। सेना का यह लांचर 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर शिव के पिनाक से क्&#x200d;यों चिंतित हैं पड़ोसी मुल्&#x200d;क। इसकी क्&#x200d;या मारक क्षमता है। इसकी क्&#x200d;या खूबियां हैं। भारतीय सेना के लिए यह वरदान कैसे और क्&#x200d;यों बना। इसकी किस क्षमता से सेना इतराती है।</p>



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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="300" height="168" data-id="77717" src="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2022/08/jh.jpg" alt="" class="wp-image-77717" srcset="https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2022/08/jh.jpg 300w, https://adeventmedia.com/wp-content/uploads/2022/08/jh-150x84.jpg 150w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></figure>
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<p>पिनाक का यह अडवांस्ड वर्जन 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मनों के ठिकानों को पूरी तरह से ध्वस्त कर सकता है। यह लांचर किसी भी मौसम में फायर कर सकता है। अपने मल्टी बैरल के जरिए यह लांचर 44 सेकेंड में 72 राकेट दाग सकता है। रक्षा मामलों के जानकार डा अभिषेक प्रताप सिंह का कहना है कि डीआरडीओ ने पिनाक को अपनी सैन्&#x200d;य जरूरतों के लिहाज से विकसित किया है। इसके दायरे में पाकिस्&#x200d;तान के कई शहर शामिल हो सकते हैं। यह अन्&#x200d;य लांचारों की तरह भारी भरकम नहीं है। इसको आसानी से एक स्&#x200d;थान से दूसरे स्&#x200d;थान पर ले जाया जा सकता है। किसी भी इलाके में यह सफल है। इसको लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से चलाना जितना आसान है उतना ही पाकिस्&#x200d;तान से सटे भारतीय सीमा से भी।</p>



<p><strong> </strong>यानी सेना का यह लांचर 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है। पिनाक शिव की धनुष की तरह ही विध्वंसक और अचूक है। इसी क्षमता के कारण इसका नाम पिनाक रखा गया। अडवांस्ड तकनीक से लैस यह लांचर अपने दुश्मनों को संभलने का तनिक भी मौका नहीं देता है। इसकी खास बात यह है कि हर मौसम और परिस्थिति में इसका इस्&#x200d;तेमाल किया जा सकता है। यह लांचर 44 सेकेंड में यह 72 राकेट दाग कर दुश्मनों के ठिकानों को ध्वस्त कर सकता है। यह दुश्&#x200d;मनों को संभलने का मौका नहीं देता है। इसका राजस्थान के पोखरण रेंज में कई सफल टेस्ट और किए गए हैं।</p>



<p>इसका निशाना अचूक है। इसकी इस क्षमता से दुश्&#x200d;मन सेना के हौसले पस्&#x200d;त हो जाते हैं। निशाना इतना सटीक कि दुश्मन का विनाश तय है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन <strong>(DRDO)</strong> ने पोखरण रेंज में इस मिसाइल के कई परीक्षण किए हैं। इस टेस्ट के दौरान 24 राकेट अलग-अलग रेंज से फायर किए गए। इस दौरान इसने अपने लक्ष्य को बड़ी ही आसानी के साथ भेद दिया। पिनाक मल्टी बैरल राकेट लांचर सिस्टम को <strong>DRDO</strong> ने तैयार किया है। एक दशक पहले ही भारतीय सेना में शामिल पिनाक मिसाइल का अब उन्नत संस्करण तैयार किया गया है।</p>



<p>पिनाक इन्हांस्ड रेंज शुरुआती पिनाक का अडवांस्ड वर्जन है। जल्द ही इसका उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। इस सिस्टम के सफल टेस्ट ने सेना को जमीन पर हमले का ज्यादा घातक विकल्प दे दिया है। इस हथियार से सेना दुश्मनों के ठिकानों को ध्वस्त कर सकता है। इस हथ&#x200d;ियार से चीन को करारा जवाब मिलेगा। गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा विवाद और हिंसक झड़प के बाद भारत अपनी सैन्य क्षमता में लगातार इजाफा कर रहा है। भारत अपने सैन्य उपकरणों को अत्याधुनिक बना रहा है। भारतीय सेना चीन की किसी भी हरकत से निपटने के लिए अब हर मोर्चे पर बड़ी तैयारी कर रहा है।</p>



<p><strong> </strong>इसके पूर्व पिनाक 44 सेकेंड में 12 राकेट दागने वाला मिसाइल लांचर सिस्टम था। इसकी मारक क्षमता महज 38 किमी तक थी। हालांकि अपग्रेड होने के बाद यह 44 सेकेंड में ताबड़तोड़ 72 राकेट दाग सकता है। वहीं यह 75 किलोमीटर दूरी तक सटीक निशाना लगा सकने में भी सक्षम है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने पिनाक मार्क-1 संस्करण का इस्तेमाल किया था। इसने पहाड़ की चौकियों पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को सटीकता के साथ निशाना बनाया था और युद्ध में दुश्मन को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया था।</p>
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