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	<title>फूलों की खेती से हो रहे आत्मनिर्भर Archives - Ad Event Media</title>
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		<title>फूलों की खेती से हो रहे आत्मनिर्भर,200 से अधिक काश्तकार ले रहें योजना का लाभ</title>
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		<pubDate>Thu, 11 Nov 2021 09:38:33 +0000</pubDate>
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<p>उद्यान विभाग की हार्टिकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन योजना बागेश्&#x200d;वर जिले के युवाओं के लिए बेहतर अवसर साबित हो रही है। काश्तकारों को हाइब्रिड गेंदा फूल का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले में तीन हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती होने लगी है। फूलों की खेती से एक काश्तकार सालभर में करीब एक से डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर रहा है। दीपावली पर कारोगार अच्&#x200d;छा रहा। इसके अलावा शादी और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए भी जिले में पर्याप्त मात्रा में फूल उपलब्ध हैं। जबकि पहले हल्द्वानी, रामनगर से फूल मंगाए जाते थे। ऐसे में अब जिला फूलों की खेती में भी आत्मनिर्भर बनने लगा है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" src="http://rashtraprahri.com/wp-content/uploads/2021/11/genda_fool.jpg" alt="" class="wp-image-13866"/></figure></div>



<p>हार्टिकल्चर के क्षेत्र में जिला बेहतर काम कर रहा है। तीन हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती हो रही है। मनकोट निवासी राजेश चौबे ने बीस नाली भूमि पर गेंदा फूल की खेती की है। उन्होंने दीपावली पर्व पर 90 हजार रुपये से अधिक के फूल बाजार में बेचे । उनके काम से प्रेरित होकर उनके चचेरे भाई मनोज और भगवत चौबे ने भी फूलों की खेती शुरू कर दी है। दोनों 50 नाली भूमि पर फूल उगा रहे हैं। इसके अलावा पालड़ीछीना निवासी मोहनी जनौटी भी गेंदा फूल के अलावा अन्य प्रजाति के फूल उगा रही हैं।</p>



<p>मनोज और भगवत ने बताया कि दीपावली पर्व पर बीस हजार के फूल बेचे गए। इसके अलावा पड़ोसी और अन्य रिश्तेदारों को हजारों के फूल मुफ्त में भेंट किए। जिले में होने वाले कार्यक्रमों में भी वह फूल दे रही हैं। शादी-विवाह का सीजन शुरू होने वाला है। जिसके लिए अभी से डिमांड आने लगी है। इधर, सहायक उद्यान अधिकारी कुलदीप जोशी ने बताया कि फूलों की खेती में जिला आत्मनिर्भर बन रहा है। अभी जिले में करीब दो सौ काश्तकार फूलों की खेती कर रहे हैं और साल में डेढ़ से दो लाख रुपये कमा रहे हैं।</p>



<p>जिला उद्यान अधिकारी, बागेश्वर आरके सिंह ने बताया कि हार्टिकल्चर टेक्नॉलाजी मिशन के तहत गेंदा फूल का बीज वितरित किया जा रहा है। हाइब्रिड गेंदा फूल का उत्पादन बढ़ रहा है। जिसका समय-सयम पर निरीक्षण भी किया गया। काश्तकारों की आय में वृद्धि हो रही है। बागेश्वर, गरुड़, काफलीगैर क्षेत्र की जलवायु गेंदा फूल की खेती के लिए बेहतर साबित हो रही है। अन्य सब्जियों के साथ मेड़ पर भी गेंदा का उत्पादन किया जा सकता है और यह कीटनाशक भी है। सब्जियों को कीटों से बचाया जा सकता है। गेंदे के फूल की खेती के लिए पालीहाउस की भी जरूरत नहीं है।</p>



<p><strong>ऐसे शुरू कर सकते हैं फूलों की खेती</strong></p>



<p>फूलों की खेती के लिए उद्यान विभाग निश्शुल्क बीज उपलब्ध कराता है। आप यदि खेती शुरू करना चाहते हैं तो विभाग पहुंचकर खेत का ब्यौरा देना होगा। जिसके बाद विभाग जरूरत के मुताबिक बीज उपलब्&#x200d;ध कराएगा। इस दौरान विभाग से ही खेती की बारीकियों के बारे में भी जाना जा सकता है। फूलों की खेती शुरू करने के लिए कम से कम दो नाली भूमि होनी चाहिए। बाजार के लिए इंटरनेट मीडिया के माध्यम से मंडी में काश्तकारों से बात कराई जाती है।</p>
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